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INTERNATIONAL JOURNAL OF EDUCATION, MODERN MANAGEMENT, APPLIED SCIENCE & SOCIAL SCIENCE (IJEMMASSS) [ Vol. 6 | No. 3 (II) | July - September, 2024 ]

(सुनील सक्सेना की कला) “दार्शनिक चिन्तन के शीष बिन्दु”

सारिका वर्मा एवं प्रो. (डॉ.) सारिका सिंह(Sarika Verma & Prof. (Dr.) Sarika Singh)

जिस प्रकार आत्म अभिव्यक्ति कला का एक महत्वपूर्ण पहलू है, जिसमें कोई कलाकार अपनी भावनाओं, विचारों और अनुभवों को कला के माध्यम से अभिव्यक्त करता है या प्रकट करता है। यह कलाकार की व्यक्तिगत्ता उसकी विशिष्टता, उसकी अनोखी पहचान, उसके व्यक्तित्व की विशेषताओं पर दृष्टि डालता है। यह कलाकार की अभिव्यक्तियों उसके व्यवहार को दुर्शता है जो उन्हें कियक्ति विशेष से अलग करता है। कलाकार अपने जीवन को कला के माध्यम से सार्थकता और संतुष्टि की ओर अग्रसित करता है। वही दार्शनिक चिंतन में कलाकार अपनी कला धारा द्वारा जीवन के अर्थ उसके उद्देश्यों को समझने का प्रयास करता है। यह चित्रकार को अपनी कला में गहराई और अर्थ जोड़ने में मदद करता है।

शब्दकोशः अभिव्यक्ति, व्यक्तिगतता, विशिष्टता, दार्शनिक चिंतन संतुष्टि, अनुभव, सार्थकता, कलाकृतियाँ।


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