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INTERNATIONAL JOURNAL OF EDUCATION, MODERN MANAGEMENT, APPLIED SCIENCE & SOCIAL SCIENCE (IJEMMASSS) [ Vol. 7 | No. 3 (I) | July - September, 2025 ]

लिंग एवं शिक्षा

ममता सैनी एवं डॉ. प्रीति शर्मा (Mamta Saini & Dr. Prity Sharma)

शिक्षा प्रत्येक व्यक्ति का मूल अधिकार है और यह सामाजिक, आर्थिक तथा सांस्कृतिक विकास का महत्वपूर्ण आधार है। किंतु जब हम शिक्षा को लिंग के परिप्रेक्ष्य में देखते हैं, तो अनेक प्रकार की असमानताएँ उभरकर सामने आती हैं। लिंग आधारित भेदभाव न केवल लड़कियों और महिलाओं को शिक्षा से वंचित करता है, बल्कि समाज की समग्र प्रगति को भी बाधित करता है। भारतीय समाज में पारंपरिक लिंग भूमिकाओं, सामाजिक अपेक्षाओं, आर्थिक सीमाओं तथा रूढ़िवादी मानसिकता के कारण विशेष रूप से ग्रामीण और पिछड़े क्षेत्रों में बालिकाओं की शिक्षा को अक्सर द्वितीय दर्जा प्राप्त होता है। बाल विवाह, घरेलू कार्यभार, सुरक्षा की चिंता, संसाधनों की कमी और सामाजिक दबाव जैसे अनेक कारण उनके शिक्षा प्राप्ति के मार्ग में बाधक बनते हैं। वहीं दूसरी ओर, शहरी क्षेत्रों में भी कभी-कभी उच्च शिक्षा या व्यावसायिक पाठ्यक्रमों में लड़कियों की भागीदारी सीमित देखने को मिलती है। हालाँकि पिछले कुछ दशकों में सरकार द्वारा ”बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ”, सर्व शिक्षा अभियान, कन्या शिक्षा प्रोत्साहन योजनाओं जैसे अनेक कार्यक्रम आरंभ किए गए हैं, जिनसे बालिकाओं की स्कूलों में नामांकन दर में वृद्धि हुई है। साथ ही महिला शिक्षकों की संख्या बढ़ाना, विद्यालयों में सुरक्षित माहौल, शौचालय की सुविधा और छात्रवृत्तियाँ भी बालिकाओं की शिक्षा को बढ़ावा देने में सहायक रही हैं। शिक्षा में लैंगिक समानता केवल नामांकन तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि पाठ्यक्रम की संरचना, शिक्षण शैली, स्कूल संस्कृति और करियर के विकल्पों तक उसका प्रभाव होना चाहिए। लिंग संवेदनशील शिक्षा प्रणाली का विकास इस दिशा में आवश्यक है जिससे लड़के और लड़कियाँ समान रूप से अवसर प्राप्त कर सकें और पारंपरिक लिंग भूमिकाओं को चुनौती दे सकें। इस शोधपत्र में लिंग एवं शिक्षा के मध्य संबंधों का विश्लेषण किया गया है, जिसमें वर्तमान परिदृश्य, प्रमुख बाधाएँ, सरकारी प्रयास, सामाजिक पहल तथा भावी दिशा पर विचार किया गया है। यह अध्ययन इस बात पर बल देता है कि शिक्षा को यदि वास्तव में समावेशी बनाना है, तो उसमें लैंगिक दृष्टिकोण को एक केंद्रीय स्थान देना होगा।

शब्दकोशः लिंग समानता, बालिका शिक्षा, लिंग आधारित भेदभाव, शिक्षा नीति, सामाजिक बाधाएँ, सरकारी योजनाएँ, कन्या शिक्षा, लैंगिक दृष्टिकोण, समावेशी शिक्षा, महिला सशक्तिकरण, शैक्षिक असमानता, लिंग संवेदनशील पाठ्यक्रम।
 


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