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महाराजा अनूप सिंह और स्थापत्य कला

ज्योति मीणा (Jyoti Meena)

बीकानेर राज्य के इतिहास में महाराजा अनूप सिंह का नाम एक ऐसे शासक के रूप में लिया जाता है जिन्होंने न केवल युद्धक कौशल और राजनीतिक कुशलता का परिचय दिया, बल्कि कला, साहित्य और स्थापत्य के क्षेत्र में भी अमिट छाप छोड़ी। सत्रहवीं शताब्दी का यह काल राजस्थान के सांस्कृतिक पुनर्जागरण का समय था। इस अवधि में बीकानेर दरबार में स्थापत्य की एक विशिष्ट शैली का विकास हुआ जिसमें मुगल प्रभाव, राजस्थानी परम्परा और स्थानीय सौंदर्य बोध का अद्भुत संगम दिखाई देता है।  महाराजा अनूप सिंह (1669 - 1698ई. ) ने अपने शासनकाल में बीकानेर को एक सुदृढ़ प्रशासनिक, सांस्कृतिक और स्थापत्य दृष्टि से समृद्ध राज्य बनाया। उनके द्वारा निर्मित दुर्ग, महल, मन्दिर और शैक्षणिक संस्थान  न केवल स्थापत्य काल के अनुपम उदाहरण हैं, बल्कि उस युग की बौद्धिक चेतना और सौंदर्यपरक दृष्टि के प्रतीक भी है।  इस शोध लेख में महाराजा अनूप सिंह की स्थापत्य दृष्टि, उनके द्वारा कराए गए निर्माण कार्याें, उनके कलात्मक संरक्षण और बीकानेर की स्थापत्य परम्परा पर उनके प्रभाव का गहन विश्लेषण किया गया है।

शब्दकोशः स्थापत्य कला, अनूप सिंह, महल वास्तु, भित्तिचित्र।
 


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