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ढूंढाड़ प्रदेष के पर्यटन विकास की योजनाऐं एवं भावी समस्याऐं

हंसराज बुनकर एवं डॉ. मदन लाल (Hansraj Bunkar & Dr. Madan Lal)

पहले के समय में पर्यटन को भ्रमण के तौर पर जाना जाता था। लोग अपने व्यस्ता भरे समय में से कुछ समय निकालकर भ्रमण करने अपने परिवार के साथ या अपने मित्रों के साथ आया करते थे। समय के साथ पर्यटन के स्वरूप एवं विचारधारा में भी परिवर्तन आया है। आज पर्यटन केवल भ्रमण से सम्बन्धित न रहकर एक उद्योग का स्वरूप भी लेता जा रहा है। नये-नये पर्यटन केन्द्रों की स्थापना की जा रही है तथा पर्यटकों को विभिन्न प्रकार की सुविधाऐं प्रदान की जा रही हैं। पर्यटन उद्योग का विकास आज केवल पर्यटन का विकास न रहकर आजीविका के विकास का विषय बनता जा रहा है। पर्यटन क्षेत्रीय ही नहीं अपितु राज्य स्तर, राष्ट्रीय स्तर तथा अंतराष्ट्रीय स्तर पर विषाल उद्योग के रूप में विकसित होता जा रहा है। पर्यटन देष की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान प्रदान करता जा रहा है। वर्तमान युग में विभिन्न नवाचारों के साथ इसके विकास हेतु प्रयास किये जा रहे हैं। आज के समय में पर्यटन उद्योग में भ्रमण के साथ व्यापार व व्यवसाय की गतिविधियों का भी महत्वपूर्ण योगदान है। व्यापार व व्यवसाय की दृष्टि से भी लोग भ्रमण कर रहे हैं। जिससे पर्यटन उद्योग को काफी गति मिल रही है। पर्यटन उद्योग में आ रहे परिवर्तन तथा लोगों के रहन-सहन व जीवनशैली में आ रहे परिवर्तन एवं विकास की गति को /यान में रखते हुए पर्यटन उद्योग के विकास में अभिवृद्धि किये जाने की महती आवष्यकता है। पर्यटन उद्योग के विकास की भावी सम्भावनाओं का आंकलन करने तथा भविष्य की आवष्यकताओं को म/यनजर रखते हुए पर्यटन उद्योग में क्रांति लाने की आवष्यकता है। इस हेतु विभिन्न प्रकार के नवाचार करने तथा औद्योगिक एवं सांस्कृतिक विचारधारा को जोड़कर चलने की महती आवष्यकता है।

शब्दकोशः पर्यटन सुविधा, अर्थव्यवस्था, राष्ट्रीय आय, पर्यटन उद्योग, नवाचार, औद्योगिक, सांस्कृतिक विचारधारा।
 


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