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INTERNATIONAL JOURNAL OF EDUCATION, MODERN MANAGEMENT, APPLIED SCIENCE & SOCIAL SCIENCE (IJEMMASSS) [ Vol. 7 | No. 4 (I) | October - December, 2025 ]

विवाहित कामकाजी महिलाओं की दोहरी कार्य भूमिकाः भारतीय समाज के विशेष संदर्भ में

सविता भदौरिया (Savita Bhadoriya)

महिला शिक्षा तथा सशक्तिकरण के बहुआयामी प्रयास, उदारवादी विचारधारा, तकनीक विकास ने महिलाओ को कार्यस्थल पर सकरात्मक वातावरण उपलब्ध कराया है । भारत देश में महिलाओं की कुल आबादी 69.2 करोड़ है, महिलाओ की कुल जनसंख्या का 41.7 प्रतिशत कामकाजी है। शिक्षा, नगरीकरण, आधुनिकीकरण से प्रेरित बदलते युग में द्वितीय दर्जा प्राप्त महिलाओं की सामाजिक, आर्थिक, पारिवारिक प्रस्थिति एवं भूमिका में भी परिवर्तन हुआ है। प्रत्येक समाज में  घरेलू कार्यो का कोई आर्थिक मूल्य ना होने पर भी उत्तरदायित्व का निर्वाह प्रत्येक महिला का नैतिक कर्तव्य माना जाता है। एक विवाहित महिला जब घर से बाहर संस्थागत वेतन आधारित कार्य करती है, तब उसे कामकाजी महिला की संज्ञा दी जाती है। प्रस्तुत शोध पत्र द्वारा कामकाजी महिलाओं की दोहरी भूमिका, भूमिका अधिभार एवं संघर्ष की चुनौतीयों से उनके व्यक्तित्व एवं स्वास्थ पर दुष्प्रभाव का अ/ययन किया गया है।

शब्दकोशः दोहरी भूमिका, प्रस्थिति, मूल्य, भूमिका व्यवहार।


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