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मुगलकालीन सांस्कृतिक प्रभावों का अध्ययन

धर्म पाल एवं डॉ. तपेन्द्र सिंह शेखावत (Dhrampal & Dr. Tapendra Singh Shekhawat)

हिन्दुओं के धार्मिक नेताओं और सन्तों ने हिन्दू-मुस्लिम विचारों के समन्वय का सफल प्रयास किया तो मुसलमानों के सूफी सम्प्रदाय तथा उनके नेताओं और कवियों ने भी हिन्दू सिद्धान्तों व परम्पराओं को ग्रहण किया। सामंजस्य की मंगलकारिणी भावना का प्रभाव इस्लाम पर भी कम न हुआ। उसमें कोमलता और सरसता आ गई। उसके स्वरूप में परिवर्तन हुआ और सूफी सम्प्रदाय का प्रादुर्भाव हुआ। हिन्दू और मुसलमान दोनों ही इस सम्प्रदाय के सन्तों को मानने लगे उनकी समाधियाँ इन दोनों समुदायों के लिये तीर्थस्थान बन गईं। ख्वाजा मुइनुद्दीन चिश्ती, निजामुद्दीन औलिया, शेखा सलीम चिश्ती ऐसे प्रसिद्ध सूफी संत थे जिनका हिन्दू भी उतना ही आदर करते थे जितना मुसलमान।

शब्दकोशः हिन्दु, मुसलमान, परम्परा, सामंजस्य, मंगलकारी, भावना, तीर्थस्थान, सम्प्रदाय, समाधियाँ, तीर्थस्थान, मंदिर, मस्जिद, समुदाय, संस्कृति, सल्तनतकाल, शक्तियाँ, ग्रामीण, पंचायत, उदारता, अनाचार, कटुŸाा, प्रचलन, शिष्टाचार, अनुसरण, स्त्रियाँ, माँग।
 


DOI:

Article DOI: 10.62823/IJEMMASSS/7.4(I).8267

DOI URL: https://doi.org/ 10.62823/IJEMMASSS/7.4(I).8267


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