भारत की अर्थव्यवस्था की रीढ़ कृषि मानी जाती है। स्वतंत्रता के बाद औद्योगिकीकरण और सेवा क्षेत्र के विस्तार के बावजूद आज भी देश की लगभग दो तिहाई जनसंख्या कृषि पर निर्भर है। म/यप्रदेश का रीवा जिला एक प्रमुख कृषि प्रधान क्षेत्र है जहाँ कृषकों की आजीविका का प्रमुख स्रोत कृषि ही है। प्रस्तुत शोधपत्र में रीवा जिले के कृषकों की आर्थिक स्थिति का वाणिज्यिक दृष्टिकोण से विश्लेषण किया गया है। अ/ययन में पाया गया कि कृषकों की भूमि जोत छोटी है, सिंचाई सुविधाएँ अपर्याप्त हैं तथा कृषि उत्पादों के विपणन में असंगठित तंत्र कार्यरत है। परिणामस्वरूप किसान सीमित आय और ऋण के दबाव में जीवन-यापन करते हैं। यद्यपि सरकार द्वारा अनेक कृषि एवं किसान कल्याण योजनाएँ संचालित हैं, परंतु इनका लाभ अपेक्षाकृत कम कृषकों तक पहुँच पाता है। अ/ययन से यह निष्कर्ष निकलता है कि कृषकों की आर्थिक स्थिति में सुधार हेतु वित्तीय समावेशन, कृषि यंत्रीकरण, विपणन सुधार तथा कृषि-उद्यमिता का विकास आवश्यक है।
शब्दकोशः कृषि, आर्थिक स्थिति, रीवा जिला, किसान, विपणन।
Article DOI: 10.62823/IJEMMASSS/7.4(I).8268