वर्तमान वैश्विक परिदृश्य में जलवायु परिवर्तन एक गंभीर पर्यावरणीय चुनौती के रूप में उभरकर सामने आया है, जिसका सीधा और गहरा प्रभाव कृषि क्षेत्र पर पड़ रहा है। कृषि, विशेषकर फसल उत्पादन, जलवायु तत्वों जैसे तापमान, वर्षा, आर्द्रता एवं मौसमीय स्थिरता पर अत्यधिक निर्भर करता है। हाल के वर्षों में तापमान में निरंतर वृद्धि, वर्षा के असामान्य पैटर्न, सूखा, बाढ़ तथा चरम मौसमी घटनाओं की आवृत्ति में वृद्धि ने फसल उत्पादन की स्थिरता को गंभीर रूप से प्रभावित किया है।यह शोध पत्र जलवायु परिवर्तन के विभिन्न पहलुओं तथा उनके फसल उत्पादन पर पड़ने वाले प्रभावों का विश्लेषण करता है। अ/ययन में यह स्पष्ट किया गया है कि तापमान वृद्धि के कारण फसलों की वृद्धि अवधि में परिवर्तन, उपज में कमी एवं गुणवत्ता में गिरावट देखी जा रही है। अनियमित वर्षा से सिंचाई व्यवस्था प्रभावित हो रही है, जिससे धान, गेहूँ, मक्का जैसी प्रमुख खाद्यान्न फसलों की उत्पादकता में अस्थिरता उत्पन्न हो रही है। इसके अतिरिक्त, जलवायु परिवर्तन के कारण कीट एवं रोगों का प्रकोप बढ़ रहा है, जिससे किसानों को आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ रहा है।शोध में यह भी पाया गया है कि मृदा की उर्वरता में कमी, जल संसाधनों का ह्रास तथा मृदा अपरदन जैसी समस्याएँ फसल उत्पादन को और अधिक चुनौतीपूर्ण बना रही हैं। छोटे एवं सीमांत किसान जलवायु परिवर्तन के दुष्प्रभावों के प्रति अधिक संवेदनशील हैं, जिससे उनकी आजीविका और खाद्य सुरक्षा पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है।अंततः, यह अ/ययन निष्कर्ष प्रस्तुत करता है कि जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने हेतु जलवायु-सहिष्णु फसल किस्मों का विकास, टिकाऊ कृषि पद्धतियों को अपनाना, तकनीकी नवाचार तथा प्रभावी नीतिगत हस्तक्षेप अत्यंत आवश्यक हैं। यह शोध नीति-निर्माताओं, कृषिविदों एवं किसानों के लिए उपयोगी मार्गदर्शन प्रदान करता है।
शब्दकोशः जलवायु परिवर्तन, फसल उत्पादन, कृषि, तापमान वृद्धि, वर्षा परिवर्तन, खाद्य सुरक्षा, टिकाऊ कृषि।