राजस्थान भारत का सबसे विस्तृत राज्य है, जहाँ भौगोलिक विविधता के साथ-साथ जलवायु परिस्थितियों में तेजी से परिवर्तन देखने को मिल रहा है। बीते कुछ दशकों में तापमान में निरंतर वृद्धि, वर्षा की अनियमितता, लम्बे समय तक चलने वाला सूखा, अचानक आने वाली बाढ़, तेज आँधियाँ तथा मरुस्थलीकरण जैसी प्रक्रियाएँ जलवायु परिवर्तन के प्रमुख संकेतक बनकर उभरी हैं। इन परिवर्तनों का प्रत्यक्ष प्रभाव राज्य की भूमि उपयोग प्रतिरूप पर पड़ रहा है, जिसके कारण कृषि, वन क्षेत्र, चरागाह भूमि, बंजर भूमि तथा शहरी विस्तार की प्रकृति में गहरे बदलाव स्पष्ट दिखाई दे रहे हैं।कृषि आधारित अर्थव्यवस्था वाले राजस्थान में जलवायु परिवर्तन का सबसे अधिक प्रभाव कृषि भूमि पर देखने को मिलता है। वर्षा में कमी तथा असमान वितरण के कारण फसलों की उत्पादकता प्रभावित होती है, जिसके परिणामस्वरूप कई क्षेत्रों में किसान अपनी जोत छोड़कर वैकल्पिक आजीविका की ओर बढ़ रहे हैं। दूसरी ओर, मरुस्थलीकरण की तीव्र गति से कृषि योग्य भूमि बंजर भूमि में बदलती जा रही है, जिससे भूमि उपयोग का संतुलन बिगड़ रहा है। राज्य के पश्चिमी भाग में रेगिस्तान के विस्तार ने भूमि उपयोग की संरचना को और अधिक चुनौतीपूर्ण बना दिया है।वन क्षेत्र में भी जलवायु परिवर्तन के कारण महत्वपूर्ण परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं। तापमान बढ़ने और वर्षा में कमी के कारण वनस्पति आवरण प्रभावित होता है, जिससे जैव विविधता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। चरागाह भूमि में कमी के कारण पशुधन पालन पर भी नकारात्मक असर पड़ रहा है, जिससे ग्रामीण समुदायों की आजीविका संकट में पड़ रही है। वहीं शहरीकरण की तीव्र गति भूमि पर दबाव बढ़ा रही है, जिसके परिणामस्वरूप कृषि एवं प्राकृतिक भूमि का उपयोग बदलकर आवासीय, औद्योगिक तथा वाणिज्यिक गतिविधियों में परिवर्तित हो रहा है।यह अ/ययन राजस्थान में जलवायु परिवर्तन और भूमि उपयोग प्रतिरूप के म/य संबंध का विश्लेषण प्रस्तुत करता है। अ/ययन से यह स्पष्ट होता है कि जलवायु परिवर्तन न केवल प्राकृतिक संसाधनों को प्रभावित कर रहा है, बल्कि सामाजिकदृआर्थिक संरचना पर भी व्यापक प्रभाव डाल रहा है। भूमि उपयोग का वैज्ञानिक एवं सतत प्रबंधन, जल संरक्षण तकनीकों का विस्तार, जलवायुदृस्मार्ट कृषि पद्धतियों को बढ़ावा तथा वनीकरण कार्यक्रम इस परिवर्तन के प्रभावों को कम करने के लिए आवश्यक हैं।
शब्दकोशः जलवायु परिवर्तन, भूमि उपयोग प्रतिरूप, मरुस्थलीकरण, कृषि परिवर्तन, वर्षा अनियमितता, राजस्थान, प्राकृतिक संसाधन, शहरीकरण, वन क्षेत्र।