शिक्षण व्यवस्था की गुणवत्ता मुख्यतः शिक्षक की कार्य-संतुष्टि पर निर्भर करती है। यदि शिक्षक अपने कार्य से संतुष्ट नहीं है, तो शिक्षण की प्रभावशीलता तथा विद्यार्थियों की शैक्षणिक उपलब्धियाँ प्रभावित होती हैं। प्रस्तुत अ/ययन का उद्देश्य जोधपुर संभाग के महाविद्यालय शिक्षकों की कार्य-संतुष्टि के स्तर का विश्लेषण करना तथा इसके प्रभावों का मूल्यांकन करना है। शिक्षक संतुष्टि का प्रभाव विद्यार्थियों की उपलब्धियों, स्कूल के समग्र वातावरण और शिक्षा के मानकों पर सीधा पड़ता है। इसलिए शिक्षा-नीतियों, प्रशिक्षण कार्यक्रमों और विद्यालय प्रबंधन प्रथाओं में शिक्षक संतुष्टि को प्राथमिकता देना अनिवार्य है। यह प्रस्तावना इस बात पर केंद्रित है कि शिक्षक संतुष्टि क्यों महत्वपूर्ण है, किन कारकों से प्रभावित होती है और इसे कैसे बढ़ाया जा सकता है ताकि एक समृद्ध और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा-व्यवस्था का निर्माण हो सके। शिक्षक संतुष्टि आधुनिक शैक्षिक अनुसंधान का एक महत्वपूर्ण विषय है क्योंकि यह शिक्षा-प्रणाली की गुणवत्ता, विद्यालय वातावरण, तथा विद्यार्थियों की उपलब्धियों पर प्रत्यक्ष तथा अप्रत्यक्ष रूप से प्रभाव डालता है। किसी भी विद्यालय या उच्च-शिक्षण संस्थान में शिक्षक वह प्रमुख तत्व होता है जो शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया को दिशा देता है इसलिए उसकी संतुष्टि का स्तर संस्थागत प्रभावशीलता का एक महत्त्वपूर्ण संकेतक माना जाता है। शिक्षा-शास्त्रियों का मत है कि यदि शिक्षक अपने कार्य, परिवेश, संसाधनों तथा पेशेवर पहचान से संतुष्ट हों, तो वे अधिक प्रेरित, नवाचारी और सहभागी शिक्षण व्यवहार अपनाते हैं जिससे सीखने की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार होता है।
शब्दकोशः कार्य-संतुष्टि, महाविद्यालय शिक्षक, जोधपुर संभाग, उच्च शिक्षा, शिक्षण-प्रभावशीलता, सरकारी एवं निजी महाविद्यालय, शिक्षक प्रेरणा, पेशेवर संतुष्टि।