महात्मा गाँधी विश्व को मानवतावदी दृष्टिकोण से देखते थे। उनकी धर्म सम्बंधी धारणा लौकिक थी और वे मानवता की सेवा को ही वास्तविक धर्म समझते थे। गाँधीजी की विचारधारा का आधारभूत तत्व यह है कि मानव और उससे जुड़ी समस्त समस्यायें नैतिक है। ऐसी स्थिति में हम अपनी अन्तरात्मा के अनुसार कार्य करें तो समाज तथा विश्व में दुःख, संकट तथा समस्याएँ नहीं रह सकती। गाँधीजी के अनुसार राजनीतिक और व्यक्तिगत कार्यों में अन्तर नहीं है। राजनीति और नीति एक ही सिक्के के दो पहलू है। राजनीति के समस्त दोषों को दूर करने का एकमात्र उपाय यह हैं कि राजनीतिक कार्यों का संचालन मानवीय दृष्टिकोण के अनुसार किया जाये। प्रस्तुत लेख में गाँधी के मानवातावदी विचारों पर चर्चा की गई है।
शब्दकोशः आ/यात्मिक, सर्वोदय, अहिंसा, अस्पृश्यता, अन्तर्राष्ट्रीयवाद।