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INTERNATIONAL JOURNAL OF EDUCATION, MODERN MANAGEMENT, APPLIED SCIENCE & SOCIAL SCIENCE (IJEMMASSS) [ Vol. 7 | No. 4 (II) | October - December, 2025 ]

कौशल विकास कार्यक्रमों का स्थानीय बाजारों में स्वरोजगार एवं लघु उद्यमों के विस्तार में योगदान - रीवा संभाग के संदर्भ में

शिवम अग्रवाल एवं डॉ. मनीष कुमार शुक्ला (Shivam Agarwal & Dr. Manish Kumar Shukla)

रीवा संभाग में कौशल विकास कार्यक्रमों का उद्देश्य युवाओं को बाजार की आवश्यकताओं के अनुरूप प्रशिक्षण प्रदान कर उन्हें स्वरोजगार एवं उद्यमिता के लिए सक्षम बनाना है। आधुनिक बाजार व्यवस्था में तकनीकी एवं व्यावसायिक कौशल स्थानीय अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने में निर्णायक भूमिका निभाते हैं। इसी दृष्टि से प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (च्डज्ञटल्), मुख्यमंत्री कौशल विकास योजना, आजीविका मिशन एवं आईटीआई संस्थानों द्वारा विभिन्न क्षेत्रों में रोजगारोन्मुखी प्रशिक्षण निरंतर संचालित किए जा रहे हैं। इन कार्यक्रमों से लाभान्वित युवा स्थानीय बाजारों में विविध सेवाओं एवं उत्पाद-आधारित लघु उद्यमों की स्थापना कर आर्थिक स्वतंत्रता प्राप्त कर रहे हैं। रीवा, सतना, सीधी एवं सिंगरौली जिलों में प्रशिक्षण प्राप्त युवाओं द्वारा स्थापित उद्यमों ने स्थानीय स्तर पर रोजगार, उत्पादन क्षमता और बाजार विस्तार में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। अ/ययन से यह स्पष्ट होता है कि कौशल विकास कार्यक्रमों ने न केवल युवाओं में उद्यमिता का विस्तार किया है, बल्कि स्थानीय बाजारों में मांग-आपूर्ति संरचना को संतुलित करते हुए आर्थिक विकास को नई दिशा दी है। यद्यपि अवसंरचना, पूंजी की कमी, विपणन की सीमाएँ जैसी चुनौतियाँ अभी भी मौजूद हैं, परंतु कौशल विकास कार्यक्रम आर्थिक प्रगति हेतु प्रभावी साधन के रूप में उभर रहे हैं।

शब्दकोशः कौशल विकास, उद्यमिता, स्वरोजगार, लघु उद्यम, रीवा संभाग, स्थानीय बाजार, आर्थिक विकास।
 


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