महिलाओं के मानवाधिकार और लैंगिक समानता किसी भी लोकतांत्रिक एवं न्यायपूर्ण समाज की आधारशिला माने जाते हैं। इसके बावजूद आज भी विश्व के अनेक हिस्सों में महिलाओं को सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक स्तर पर असमानता, भेदभाव और हिंसा का सामना करना पड़ता है। यह शोध पत्र महिलाओं के मानवाधिकारों की अवधारणा, उनके ऐतिहासिक विकास, अंतरराष्ट्रीय तथा संवैधानिक प्रावधानों और वर्तमान सामाजिक चुनौतियों का विश्लेषण प्रस्तुत करता है। अ/ययन में यह स्पष्ट किया गया है कि केवल कानूनी व्यवस्था से लैंगिक समानता सुनिश्चित नहीं की जा सकती, बल्कि इसके लिए सामाजिक चेतना, शिक्षा, आर्थिक सशक्तिकरण और सकारात्मक सांस्कृतिक परिवर्तन आवश्यक हैं। शोध पत्र यह भी रेखांकित करता है कि महिलाओं की समान भागीदारी के बिना सतत विकास और सामाजिक न्याय की कल्पना अधूरी है। अतः महिलाओं के मानवाधिकारों की रक्षा और लैंगिक समानता की स्थापना हेतु समन्वित एवं बहुआयामी प्रयास अनिवार्य हैं।
शब्दकोशः लैंगिक समानता, ऐतिहासिक विकास, संवैधानिक प्रावधान, बहुआयामी प्रयास, सांस्कृतिक परिवर्तन।