राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 (छम्च् 2020) ने भारतीय शिक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार की दिशा में नए दृष्टिकोण प्रस्तुत किए हैं। इस नीति का मुख्य उद्देश्य केवल ज्ञान का संवर्धन नहीं, बल्कि विद्यार्थियों में समग्र भाषा कौशल, रचनात्मकता, और बहुभाषीय क्षमता का विकास करना है। हिंदी, जो भारत की प्रमुख मातृभाषाओं में से एक है, को इस नीति में विशेष महत्व दिया गया है। नीति में मातृभाषा या क्षेत्रीय भाषा में प्रारंभिक शिक्षा के महत्व को स्वीकारते हुए, हिंदी शिक्षण के लिए नई रणनीतियाँ, पाठ्यक्रम सुधार, तकनीकी और डिजिटल संसाधनों का उपयोग, और शिक्षक प्रशिक्षण पर जोर दिया गया है।हिंदी शिक्षण में नई दिशा का उद्देश्य न केवल भाषा कौशल बढ़ाना है, बल्कि विद्यार्थियों में संवाद क्षमता, साहित्यिक सृजन, और सांस्कृतिक समझ को भी विकसित करना है। इसके लिए नीति ने परियोजना-आधारित शिक्षण, संवादात्मक शिक्षण, और मल्टीमीडिया संसाधनों का समावेश किया है। इसके अतिरिक्त, मूल्यांकन पद्धति में सुधार, शिक्षार्थियों के दृष्टिकोण से सीखने की प्रक्रिया को सहज और रुचिकर बनाने की दिशा में कदम उठाए गए हैं।हालांकि, हिंदी शिक्षण में कुछ चुनौतियाँ भी विद्यमान हैं, जैसे कि बहुभाषीय वातावरण में संतुलन बनाए रखना, शिक्षण-संसाधनों की कमी, और शिक्षार्थियों की रुचि को बनाए रखना। इसके बावजूद, छम्च् 2020 हिंदी शिक्षण को एक नई दिशा प्रदान करता है, जिसमें तकनीकी नवाचार, शिक्षक क्षमता निर्माण, और विद्यार्थियों की बहुमुखी भाषा दक्षता को बढ़ावा देना शामिल है। नीति के सफल कार्यान्वयन से हिंदी भाषा का शैक्षिक और सामाजिक महत्व बढ़ेगा और यह विद्यार्थियों को वैश्विक परिप्रेक्ष्य में भी प्रतिस्पर्धी बनाएगी। इस शोध पत्र में छम्च् 2020 के अंतर्गत हिंदी शिक्षण की नई दिशा, अवसर, चुनौतियाँ और प्रभावशीलता का विश्लेषण प्रस्तुत किया गया है।
शब्दकोशः राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020, हिंदी शिक्षण, बहुभाषावाद, मातृभाषा आधारित शिक्षा, शैक्षिक नवाचार, िशक्षक प्रशिक्षण, डिजिटल शिक्षण।