ISO 9001:2015

नई कहानी आंदोलन में संबंध-विच्छेद और आज का पारिवारिक विघटन

बहादर लाल (Bahadar Lal)

नई कहानी आंदोलन हिंदी साहित्य में 1950-60 के दशक में एक साहित्यिक क्रांति के रूप में उभरा, जिसने पारंपरिक कथ्य और शैली को चुनौती दी और कहानी को केवल नैतिक शिक्षा या मनोरंजन के साधन तक सीमित न रखकर सामाजिक यथार्थ, मानवीय मनोविज्ञान और आंतरिक संघर्ष का संवेदनशील माध्यम बना दिया। इस आंदोलन में कथाकारों ने पारिवारिक संरचना, दांपत्य संबंधों और पीढ़ीगत अंतर को यथार्थवादी  दृष्टि से चित्रित किया, जहाँ परिवार केवल संरक्षण और सुरक्षा का केन्द्र नहीं, बल्कि तनाव और असंतोष का स्थल बन गया। राजेंद्र यादव, मोहन राकेश और कमलेश्वर जैसे कहानीकारों ने पात्रों के मानसिक द्वंद्व, स्त्रीदृपुरुष संबंधों की जटिलता और सामाजिक दबावों को सजीव रूप से प्रस्तुत किया, जिससे हिंदी कहानी में भावनात्मक गहराई, यथार्थवाद और सामाजिक संवेदनशीलता का विकास हुआ। नई कहानी ने यह दिखाया कि परिवार केवल घर का ढांचा नहीं, बल्कि मानसिक, भावनात्मक और सामाजिक संरचना का प्रतिबिंब है, जो समय, परिस्थितियों और व्यक्तित्वगत परिवर्तन के साथ लगातार बदलता रहता है। इस दृष्टि से नई कहानी आंदोलन ने समाज और साहित्य के बीच एक सशक्त संवाद स्थापित किया, जो आज भी उतना ही प्रासंगिक और आवश्यक है जितना उस समय था। समकालीन दृष्टि से देखा जाए तो आज का पारिवारिक विघटन नई कहानी में प्रस्तुत संरचनात्मक और भावनात्मक संकटों का व्यावहारिक उदाहरण बन चुका है। आधुनिक परिवारों में दांपत्य संबंधों में तनाव, माता-पिता और संतान के बीच बढ़ती दूरी, स्त्री-पुरुष संबंधों में समानता की आकांक्षा और संवादहीनता ने पारिवारिक संरचना को अस्थिर और संवेदनात्मक रूप से कमजोर कर दिया है। समकालीन साहित्यकार जैसे निदा फ़ाज़ली, वसीम बरेलवी, बसीर भद्र, राहत इंदौरी, कुमार विश्वास और मुनव्वर राणा ने अपनी गज़लों और काव्य रचनाओं में आधुनिक परिवार, रिश्तों की टूटन और आंतरिक संघर्ष को मार्मिक और प्रभावशाली ढंग से व्यक्त किया। उनके रचनात्मक दृष्टिकोण से यह स्पष्ट होता है कि नई कहानी आंदोलन और समकालीन साहित्य दोनों ही व्यक्तिगत स्वतंत्रता, मानसिक संघर्ष और पारिवारिक यथार्थ के बीच संतुलन की तलाश करते हैं। यही कारण है कि आधुनिक समाज और नई कहानी के पात्रों के अनुभवों में गहरी समानता पाई जाती है। इस दृष्टि से नई कहानी केवल साहित्यिक प्रयोग नहीं, बल्कि समाज और परिवार की मानसिक, सामाजिक और भावनात्मक स्थितियों का प्रतिबिंब भी है। 

शब्दकोशः नई कहानी आंदोलन, हिंदी साहित्य, पारिवारिक विघटन, दांपत्य संबंध, स्त्री-पुरुष संबंध, समकालीन समाज, सामाजिक यथार्थ, मानसिक संघर्ष, समकालीन साहित्यकार, यथार्थवादी कथा।
 


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