ISO 9001:2015

आर्थिक विकास में लघु उद्योगों की भूमिका

कैलाश चन्द्र मीना (Kailash Chandra Meena)

भारत में अनेक प्रकार के लघु उपक्रम प्रचलित रहे हैं जो कुटीर उद्योगों, ग्रामीण उद्योगों, हाथकरघा उद्योगों, खादी ग्रामोद्योगों के नाम से भी जाने जाते थे। परम्परागत रूप में इन्हें ग्रामीण एवं लघु उद्योगों के नाम से जाना जाता रहा है। किन्तु जब से भारत में सूक्ष्म, लघु एवं म/यम उपक्रम विकास अधिनियम, 2006 अर्थात सूलम उपक्रम विकास अधिनियम 2006 लागू हुआ है तब से लघु एवं म/यम उद्योगों की सम्पूर्ण अवधारणा में अत्यधिक बदलाव हुआ है। दुनिया के कई देशों में आज भी लघु एवं म/यम- आकार के उपक्रम की अवधारणा प्रचलित है। किन्तु भारत में 2 अक्टूबर 2006 के बाद से ही लघु एंव म/यम उद्योगो की अवधारणा को छोड़कर सूक्ष्म लघु एवं म/यम अवधारणा अर्थात सूलम उपक्रमों की अवधारणा को अपना लिया है। जिसके कारण लघु एवं म/यम आकार के उपक्रमों के साथ सभी उद्योगों का समावेश हो गया है। सम्पूर्ण विश्व में लघु एवं म/यम उद्योगों का आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान रहा है। भारत में भी लघु उद्योग आर्थिक विकास एवं रोजगार वृद्धि में सहयोग दे रहे हैं।

शब्दकोशः आर्थिक विकास, रोजगार, राजस्व, लघुउद्योग, विनियोग, उपक्रम, सकल घरेलू उत्पाद, अर्थव्यवस्था सूलम उपक्रम।


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