मानव सभ्यता जितनी प्राचीन है उतने ही प्राचीन भाषा एवं भाव अभिव्यक्ति के माध्यम हैं। मनुष्य पौराणिक काल से ही अपने भाव, विचार एवं अनुभवों को एक दूसरे के समक्ष विभिन्न माध्यमों से प्रकट करता रहा है। समय के साथ-साथ अभिव्यक्ति के माध्यम बदलते भी रहे हैं और प्रत्येक काल में अलग-अलग नाम से माध्यम जाने जाते रहे हैं, लेकिन सामूहिक संचार के लिए वर्तमान में ’जनसंचार’ शब्द का प्रयोग होता है।यह शब्द नया है, लेकिन भारत में जनसंचार की अवधारणा बहुत प्राचीन एवं काल सापेक्ष है। समय के साथ-साथ संचार की प्रक्रिया के विभिन्न प्रकार एवं आयाम विकसित हुए हैं।पौराणिक काल में महाभारत का संजय वृतांत, कंस को अपने वध की संभावना, देवकी पुत्र द्वारा यह आकाशवाणी आदि उदाहरण मिलते हैं। मेले, तीर्थांटन,सत्संग, भजन आदि परंपरागत जनसंचार के माध्यम थे। आज तकनीकी युग में जनसंचार के अनेक माध्यम विकसित हो गए हैं जिनके कारण जनसंचार के क्षेत्र में काफी सुगमता हुई है। जनसंचार माध्यमों के द्वारा संचार संप्रेषण की सबसे अधिक आवश्यकता उचित भाषिक विन्यास है। वर्तमान समय में भारत में जनसंचार के माध्यमों के लिए हिंदी भाषा सर्वाधिक उपयुक्त है। हिंदी का भाषिक विन्यास विभिन्न संचार माध्यमों में किस रूप में प्रयुक्त होता है। यह अध्ययन का क्षेत्र है।