वर्तमान शैक्षणिक परिदृश्य में विद्यार्थियों की सफलता केवल बौद्धिक क्षमता तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि भावनात्मक, सामाजिक एवं व्यवहारिक क्षमताएँ भी समान रूप से महत्वपूर्ण मानी जा रही हैं। भावनात्मक बुद्धिमत्ता (म्उवजपवदंस प्दजमससपहमदबम) व्यक्ति की वह क्षमता है जिसके मा/यम से वह अपनी तथा दूसरों की भावनाओं को पहचानने, समझने, नियंत्रित करने एवं उन्हें व्यवहार में प्रभावी रूप से उपयोग करने में सक्षम होता है। अनेक राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय अ/ययनों से यह स्पष्ट हुआ है कि भावनात्मक बुद्धिमत्ता विद्यार्थियों की प्रेरणा, आत्म-नियंत्रण, तनाव प्रबंधन तथा सामाजिक समायोजन को प्रभावित करती है, जिसका प्रत्यक्ष प्रभाव उनकी शैक्षणिक उपलब्धि पर पड़ता है। प्रस्तुत शोध-पत्र एक समीक्षात्मक अ/ययन है, जिसमें भावनात्मक बुद्धिमत्ता और शैक्षणिक उपलब्धि के म/य संबंध को विभिन्न पूर्ववर्ती शोधों के आधार पर विश्लेषित किया गया है तथा शिक्षा के क्षेत्र में इसके व्यावहारिक निहितार्थों को स्पष्ट करने का प्रयास किया गया है।
शब्दकोशः भावनात्मक बुद्धिमत्ता, शैक्षणिक उपलब्धि, आत्म-नियंत्रण, प्रेरणा, विद्यार्थी।