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पर्यटन विकास की गतिशीलता एवं चुनौतियों का भौगोलिक अ/ययनः (सीकर जिले के विशेष संदर्भ में)

डॉ. धीरज कुमार एवं मुकेश कुमार (Dr. Dheeraj Kumar & Mukesh Kumar)

पर्यटन के इतिहास की गाथा भी अत्यन्त रोचक है। ईसा से चार हजार वर्ष पूर्व बेबीलोनिया में सर्वप्रथम पर्यटन की उपज के परिणाम सार्थक रूप से उभर कर सामने आए और तब ही वास्तविक रूप में यात्रा के महत्व को भी समझा गया। यहाँ यह कहा जा सकता है कि बेबीलोनिया मंे ही यात्रा के महत्व को पर्यटन के रूप में स्वीकारा गया। दरअसल मुद्रा के आविष्कार तथा व्यापार-वाणिज्य के विकास के साथ ही पर्यटन की भी सही अर्थों मंे शुरूआत हुई। मोहनजोदड़ों व हडप्पा की खुदाई में बहुत सी ऐसी वस्तुएं प्राप्त हुई है, जिनसे यह अनुमान लगाया जा सकता है कि उस सभ्यता में भी लोग व्यापार तथा वाणिज्य के मा/यम से दूर देशों की यात्रा पर निकला करते थे। सिंधु घाटी की सभ्यता के अवशेषों में कुछ ऐसी वस्तुएं प्राप्त हुई है जिनसे उस समय की यात्राओं का पता लगता है। यहाँ तक कि सिंधु घाटी की सभ्यता की तो बहुत-सी वस्तुएं विदेशों में भी पाई गई है। सुमेरिया मंे हाल के वर्षों में कुछ ऐसी मुद्राएं मिली है जिनसे यह पता चलता है कि वहां से सिंधु घाटी का वास्तविक सम्बन्ध था। तीर्थ यात्रा, खोजी प्रकृति, शिक्षा व ज्ञान प्राप्ति के लिए मनुष्य की भूख, मनोरंजन, व्यवसाय-उद्योग के साथ ही साहसिक गतिविधियों के रूप में पर्यटन की सोच मनुष्य में आदिकाल से ही रही है। इससे प्रतीत होता है कि पर्यटन शब्द का प्रयोग 1876 से भी पहले होता था।

शब्दकोशः पर्यटन, भौगोलिक अ/ययन, व्यवसाय-उद्योग, व्यापार-वाणिज्य।
 


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