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INTERNATIONAL JOURNAL OF EDUCATION, MODERN MANAGEMENT, APPLIED SCIENCE & SOCIAL SCIENCE (IJEMMASSS) [ Vol. 7 | No. 4 (II) | October - December, 2025 ]

सीकर जिले के संदर्भ में पर्यटक स्थलों एवं पर्यटन संभावनाओं का भौगोलिक अ/ययन

डॉ. धीरज कुमार एवं मुकेश कुमार (Dr. Dheeraj Kumar & Mukesh Kumar)

पर्यटन का अर्थ आज सिर्फ नयी-नयी जगहों की सैर करना नहीं बल्कि दुनिया जहान से अपने आपको जोड़ लेना है। उन्नत या साहसिक पर्यटन एक ऐसा आयाम है जो पर्यटन सुख के अलावा शरीर के साथ ही मस्तिष्क की समग्र गतिविधि निस्तारण में सहयोगी भूमिका अदा कर रहा है। भारत में भी यह मान्यता अब तेजी से फैलती जा रही है कि जहां कुदरत मेहरबान न हो तो अपने ही जीवन और उद्यम से बहुत कुछ हासिल किया जा सकता है। इस बात को समझने के लिए एक अकेला ही दृष्टांत काफी होगा। प्राकृतिक संपदा के दृष्टिकोण से उत्तर भारत में हरियाणा, देश के ही कुछ अन्य प्रांतों से बहुत पिछड़ा हुआ था। पड़ोसी राज्य राजस्थान से उसे रेगिस्तान और रेतीले मैदानों का सन्नाटा तो जरूर मिला पर ऐतिहासिक, पुरातात्विक विरासत नहीं। बावजूद उसके कुशल नेतृत्व, स्थानीय जनता के जीवट और उसकी लगन ने चद वर्षो में ही राजस्थान का समग्र कायाकल्प कर डाला। आज स्थिति यह है कि राजस्थान पर्यटन के दृष्टिकोण से देश में अबल है। 
‘‘ अथिति देवो भवः ’’

शब्दकोशः पर्यटन, भौगोलिक अ/ययन, प्राकृतिक संपदा, रेतीले मैदान।
 


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