ISO 9001:2015

भरतपुर एवं डीग जिलों में खाद्यान्न फसलों की उत्पादकता का विश्लेषण

रेनू सोलंकी एवं डॉ. आशुतोष (Renu Solanki & Dr. Ashutosh)

भरतपुर एवं डीग जिलों में खाद्यान्न फसलों की उत्पादकता का विश्लेषण एक महत्वपूर्ण क्षेत्रीय असंतुलन को प्रकट करता है। कोटि गुणांक के आधार पर किये गये अ/ययन से स्पष्ट होता है कि बयाना तहसील का कोटि गुणांक 1.269 के साथ सर्वोच्च उत्पादकता प्राप्त करने में सफल रही है जो इस तहसील की कृषि पद्धतियों, भौगोलिक परिस्थितियों एवं संसाधन प्रबंधन की श्रेष्ठता को दर्शाता है। इसके विपरीत भरतपुर एवं नदबई तहसीलों का उत्पादकता स्तर निम्न पाया गया है जो चिन्ता का विषय है तथा तत्काल हस्तक्षेप की आवश्यकता है। अध्ययन क्षेत्र की 16 तहसीलों को तीन श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया है। जिसमें उच्च उत्पादकता वाली 2 तहसीलें बयाना तथा वैर हैं जो कुल खाद्यान्न फसलों के अन्तर्गत क्षेत्रफल का 23.93 प्रतिशत क्षेत्रफल घेरे हुये हैं। मध्यम उत्पादकता वाली 12 तहसीलें नगर, रूपवास, पहाड़ी, भुसावर, डीग-जनूथर, उच्चैन, सीकरी, कामां-जुरहरा, कुम्हेर-रारह हैं। इन तहसीलों के अन्तर्गत खाद्यान्न फसलों का 58.92 प्रतिशत क्षेत्रफल आता है। निम्न उत्पादकता क्षेत्र के अन्तर्गत 2 तहसीलें भरतपुर तथा नदबई आती है इनके अन्तर्गत 17.15 प्रतिशत क्षेत्रफल आता है। यह वितरण दर्शाता है कि जिलों में उत्पादकता संवर्धन की पर्याप्त गुंजाइश मौजूद है और उचित नीतिगत हस्तक्षेप के माध्यम से समग्र कृषि उत्पादकता में उल्लेखनीय सुधार संभव है। भरतपुर एवं डीग जिलों में खाद्यान्न फसलों की उत्पादकता संवर्धन हेतु एक बहुआयामी रणनीति अपनाना आवश्यक है। जिसमें तत्काल, मध्यकालीन एवं दीर्घकालीन उपायों का समावेश हो। सर्वप्रथम निम्न उत्पादकता वाली भरतपुर एवं नदबई तहसीलों मिट्टी की गुणवत्ता परीक्षण, सिंचाई अवसंरचना का विकास एवं जलप्रबन्धन तकनीकों का आधुनिकीकरण करना आवश्यक है। तकनीकी सहायता के क्षेत्र में कृषि विज्ञान केन्द्रों के माध्यम से किसानों को नियमित प्रशिक्षण, उन्नत किस्म के बीजों की उपलब्धता, फसल-चक्र की वैज्ञानिक पद्धति एवं जैविक व रासायनिक उर्वरकों के संतुलित उपयोग को बढ़ावा देना चाहिये। बयाना तथा वैर तहसीलों की सफल कृषि पद्धतियों को अन्य तहसीलों में प्रसारित करने हेतु किसान से किसान शिक्षा कार्यक्रम चलाने के साथ साथ दीर्घकालिक विकास हेतु स्थानीय जलवायु के अनुकूल फसल किस्मों का विकास, कृषि मशीनीकरण का प्रसार, कृषि आधारित उद्योगों की स्थापना और नीतिगत स्तर पर उत्पादकता आधारित प्रोत्साहन योजना, कृषि बीमा, ऋण सुविधाओं का विस्तार, बाजार संवर्धन एवं मूल्य संवर्धन की उचित व्यवस्था करनी चाहिये।

शब्दकोशः डीग जिला, खाद्यान्न फसल, जलवायु, कृषि बीमा, फसल-चक्र।
 


DOI:

Article DOI: 10.62823/IJEMMASSS/7.4(III).8432

DOI URL: https://doi.org/10.62823/IJEMMASSS/7.4(III).8432


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