ISO 9001:2015

शब्दब्रह्म की शास्त्रीय विवेचना

डॉ. रेनू रानी शर्मा (Dr. Renu Rani Sharma)

ऋग्वेद के एक मन्त्र में शब्दब्रह्म का सुन्दर विवेचन है। वहाँ बताया गया है कि शब्दब्रह्म ही अविद्या के द्वारा अपने को विविधतापूर्ण सांसारिक पदार्थो के रूप में प्रकाषित करता है। वहाँ उसे महादेव कहा गया है। उन शब्द रूप महादेव को वृषभ भी कहा गया है। उस शब्द रूप वृषभ की परा, पष्यन्ती, म/यमा और वैखरी रूप चार वाणियाँ, चार श्रृंडग हैं और चतुर्थ वाणी को मनुष्य बोलते हैं। उन महादेव के भूत, भविष्य, वर्तमान-ये तीनों काल तीन पद हैं। शब्द के नित्य और अनित्य (कार्य) रूप दो षिर हैं। 

शब्दकोशः ऋग्वेद, शब्दब्रह्म, नित्य, अनित्य, पष्यन्ती, म/यमा।
 


DOI:

Article DOI: 10.62823/IJEMMASSS/7.4(III).8485

DOI URL: https://doi.org/10.62823/IJEMMASSS/7.4(III).8485


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