प्रस्तुत शोधपत्र में मध्य प्रदेश के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) की वर्तमान स्थिति, उनके आर्थिक योगदान तथा सामने आ रही प्रमुख चुनौतियों का विश्लेषण किया गया है। एमएसएमई क्षेत्र राज्य की औद्योगिक संरचना का आधार है और समग्र आर्थिक विकास में इसकी भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है। यह क्षेत्र राज्य में बड़े पैमाने पर स्व-रोजगार एवं अन्य रोजगार के अवसर सृजित करता है, जिससे आजीविका के वैकल्पिक साधन विकसित होते हैं और सामाजिकदृआर्थिक स्थिरता को बल मिलता है। मध्य प्रदेश के ग्रामीण एवं पिछड़े क्षेत्रों में एमएसएमई इकाइयाँ स्थानीय संसाधनों के उपयोग के माध्यम से औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा देती हैं, जिससे क्षेत्रीय असंतुलन को कम करने में सहायता मिलती है। कम पूंजी निवेश में अधिक उत्पादन एवं रोजगार की क्षमता के कारण इस क्षेत्र का श्रमदृपूंजी अनुपात अपेक्षाकृत अधिक है, जो इसे समावेशी विकास का प्रभावी माध्यम बनाता है। इसके अतिरिक्त, एमएसएमई विनिर्माण, सेवा तथा सहायक उद्योगों के विकास में सहायक होकर राज्य की आर्थिक विविधता को सुदृढ़ करते हैं। हालाँकि, वित्त की उपलब्धता, उन्नत प्रौद्योगिकी का अभाव, कौशल विकास की कमी, विपणन संबंधी कठिनाइयाँ तथा अवसंरचनात्मक समस्याएँ एमएसएमई के सतत विकास में प्रमुख बाधाएँ बनी हुई हैं। इन चुनौतियों के समाधान हेतु प्रभावी नीतिगत समर्थन, संस्थागत सुदृढ़ीकरण तथा नवाचार को प्रोत्साहन आवश्यक है, जिससे मध्य प्रदेश में एमएसएमई क्षेत्र को दीर्घकालिक और संतुलित विकास की दिशा में अग्रसर किया जा सके।
शब्दकोशः सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम, औद्योगिक विकास, क्षेत्रीय संतुलन, वित्तीय समावेशन, रोजगार सृजन, औद्योगिक नीति मध्य प्रदेश।