कोविड-19 महामारी ने विश्व भर की शिक्षा-व्यवस्था को अभूतपूर्व रूप से प्रभावित किया। विद्यालयों, महाविद्यालयों तथा विश्वविद्यालयों के बंद होने के कारण शिक्षण-अधिगम की पारंपरिक व्यवस्था अचानक ऑनलाइन मा/यमों पर निर्भर हो गई। यूनेस्को के अनुसार महामारी ने 1.5 अरब से अधिक शिक्षार्थियों को प्रभावित किया, जबकि भारत में यूनिसेफ ने संकेत दिया कि करोड़ों स्कूली विद्यार्थियों की नियमित शिक्षा बाधित हुई और घर से दूरस्थ शिक्षा ही एकमात्र विकल्प बन गई। साथ ही, डिजिटल संसाधनों की असमान उपलब्धता, इंटरनेट की गुणवत्ता, पारिवारिक सहयोग की कमी, मानसिक दबाव, तथा शिक्षकों और छात्रों की तकनीकी तैयारी जैसे कारकों ने इस परिवर्तन को जटिल बना दिया। ;न्छम्ैब्व्द्ध प्रस्तुत शोध-पत्र का उद्देश्य कोविड-19 महामारी के दौरान ऑनलाइन शिक्षा के छात्रों के शैक्षणिक प्रदर्शन पर प्रभाव का विश्लेषण करना है। इस अ/ययन में वर्णनात्मक शोध-पद्धति का उपयोग किया गया है। विश्लेषण के लिए 150 छात्रों पर आधारित एक उदाहरणात्मक सर्वेक्षण-डेटा का प्रयोग किया गया है। अ/ययन में पाया गया कि ऑनलाइन शिक्षा ने एक ओर सीखने की निरंतरता बनाए रखने, डिजिटल दक्षता बढ़ाने, समय-लचीलापन देने और अ/ययन-सामग्री तक त्वरित पहुँच उपलब्ध कराने में सहायता कीय दूसरी ओर इससे /यानाभाव, संवादहीनता, मूल्यांकन की विश्वसनीयता, नेटवर्क समस्याएँ, तकनीकी असमानता तथा सीखने की गुणवत्ता में गिरावट जैसी समस्याएँ भी सामने आईं। अधिकांश छात्रों ने अनुभव किया कि उनका शैक्षणिक प्रदर्शन या तो म/यम स्तर तक प्रभावित हुआ या नकारात्मक रूप से प्रभावित हुआ, जबकि एक सीमित वर्ग ने इसे सकारात्मक माना। अ/ययन निष्कर्ष देता है कि ऑनलाइन शिक्षा को पूर्णतः नकारात्मक या पूर्णतः सकारात्मक नहीं कहा जा सकता। इसका प्रभाव सामाजिक-आर्थिक पृष्ठभूमि, संसाधनों की उपलब्धता, विषय की प्रकृति, शिक्षण-पद्धति, और छात्र की स्व-अनुशासन क्षमता पर निर्भर करता है। भविष्य के लिए मिश्रित शिक्षण (ब्लेंडेड लर्निंग), डिजिटल अवसंरचना, शिक्षक-प्रशिक्षण, समावेशी नीति तथा मानसिक स्वास्थ्य सहयोग को प्राथमिकता देना आवश्यक है।
शब्दकोशः कोविड-19, ऑनलाइन शिक्षा, शैक्षणिक प्रदर्शन, डिजिटल विभाजन, दूरस्थ अधिगम, विद्यार्थी, महामारी, ई-लर्निंग।