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INTERNATIONAL JOURNAL OF EDUCATION, MODERN MANAGEMENT, APPLIED SCIENCE & SOCIAL SCIENCE (IJEMMASSS) [ Vol. 7 | No. 4 (III) | October - December, 2025 ]

शिक्षा और लैंगिक समानताः भारत के भविष्य को बदलना

Dr. Hetal S.Nenuji

शिक्षा और लैंगिक समानता किसी भी राष्ट्र के सतत और समावेशी विकास के दो महत्वपूर्ण स्तंभ हैं। भारत जैसे विकासशील देश में, जहाँ सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक विविधताएँ व्यापक हैं, वहाँ शिक्षा के मा/यम से लैंगिक समानता को बढ़ावा देना देश के भविष्य को बदलने की क्षमता रखता है। शिक्षा न केवल ज्ञान और कौशल प्रदान करती है, बल्कि यह व्यक्तियों को सशक्त बनाकर सामाजिक रूढ़ियों और भेदभाव को चुनौती देने का भी मा/यम बनती है।भारत में ऐतिहासिक रूप से महिलाओं और बालिकाओं को शिक्षा के क्षेत्र में अनेक असमानताओं का सामना करना पड़ा है। पारंपरिक सोच, गरीबी, बाल विवाह, घरेलू जिम्मेदारियाँ और सुरक्षा संबंधी चिंताएँ बालिका शिक्षा में प्रमुख बाधाएँ रही हैं। हालांकि हाल के वर्षों में साक्षरता दर में सुधार हुआ है, फिर भी शिक्षा की गुणवत्ता, उच्च शिक्षा में भागीदारी और रोजगार से जुड़ी शिक्षा में लैंगिक अंतर स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। यह असमानता न केवल महिलाओं के व्यक्तिगत विकास को सीमित करती है, बल्कि देश की आर्थिक और सामाजिक प्रगति को भी प्रभावित करती है। शिक्षा लैंगिक समानता को बढ़ावा देने का सबसे प्रभावी साधन है। शिक्षित महिलाएँ न केवल बेहतर स्वास्थ्य, पोषण और पारिवारिक निर्णयों में योगदान देती हैं, बल्कि वे कार्यबल, नेतृत्व और नीति-निर्माण में भी सक्रिय भूमिका निभाती हैं। बालिका शिक्षा से गरीबी में कमी, जनसंख्या नियंत्रण और सामाजिक न्याय को बढ़ावा मिलता है। भारत सरकार द्वारा चलाई गई योजनाएँ जैसे बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ, सर्व शिक्षा अभियान और राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 शिक्षा में लैंगिक समानता को सुदृढ़ करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। यह अ/ययन इस निष्कर्ष पर पहुँचता है कि यदि शिक्षा प्रणाली को अधिक समावेशी, संवेदनशील और समान अवसर प्रदान करने वाली बनाया जाए, तो भारत लैंगिक समानता की दिशा में उल्लेखनीय प्रगति कर सकता है। शिक्षा के मा/यम से लैंगिक समानता न केवल महिलाओं के सशक्तिकरण का मार्ग प्रशस्त करती है, बल्कि एक न्यायसंगत, प्रगतिशील और मजबूत भारत के निर्माण में भी निर्णायक भूमिका निभाती है।

शब्दकोशः शिक्षा, लैंगिक समानता, महिला सशक्तिकरण, बालिका शिक्षा, भारत का विकास, सामाजिक न्याय, राष्ट्रीय शिक्षा नीति।
 


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