भारत जैसे विकासशील राष्ट्र में रोजगार सृजन आर्थिक विकास, सामाजिक स्थिरता तथा समावेशी प्रगति का एक मूलभूत आधार है। बदलते आर्थिक परिदृश्य में सरकार द्वारा समय-समय पर विभिन्न रोजगारोन्मुखी योजनाओं का क्रियान्वयन किया जाता रहा है, जिनका उद्देश्य बेरोजगारी की समस्या का शमन करना, आय स्तर में वृद्धि करना तथा ग्रामीण एवं शहरी अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ बनाना है। प्रस्तुत शोध-पत्र में रीवा जिले के संदर्भ में सरकारी योजनाओं के मा/यम से रोजगार सृजन के आर्थिक प्रभावों का विश्लेषणात्मक अ/ययन किया गया है। अ/ययन से यह परिलक्षित होता है कि शासकीय योजनाओं के प्रभाव से लाभार्थियों की आय में वृद्धि, उपभोग क्षमता में विस्तार तथा जीवन स्तर में गुणात्मक सुधार हुआ है। साथ ही, स्थानीय बाजार संरचना एवं लघु आर्थिक गतिविधियों में भी सकारात्मक परिवर्तन दृष्टिगोचर हुए हैं, जो क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था के सुदृढ़ीकरण का संकेत देते हैं। तथापि, अ/ययन में यह भी स्पष्ट हुआ कि योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता का अभाव, लाभार्थियों में सीमित जागरूकता तथा प्रशासनिक जटिलताएँ अभी भी प्रमुख बाधाएँ बनी हुई हैं। अतः यह आवश्यक प्रतीत होता है कि योजनाओं के प्रभावी एवं परिणामोन्मुखी क्रियान्वयन हेतु सुदृढ़ निगरानी तंत्र विकसित किया जाए तथा लक्षित वर्ग को योजनाओं के प्रति अधिक जागरूक एवं सक्षम बनाया जाए, जिससे इन योजनाओं के आर्थिक लाभों का अधिकतम प्रसार सुनिश्चित किया जा सके।
शब्दकोशः रोजगार सृजन, शासकीय योजनाएँ, आर्थिक प्रभाव, क्षेत्रीय विकास, आय स्तर, उपभोग क्षमता, ग्रामीण अर्थव्यवस्था, बेरोजगारी।