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INSPIRA-JOURNAL OF MODERN MANAGEMENT & ENTREPRENEURSHIP(JMME) [ Vol. 16 | No. 1(II) | January - March, 2026 ]

रोजगार योजनाओं का स्थानीय बाजार संरचना एवं व्यापारिक गतिविधियों पर प्रभावः रीवा जिले के संदर्भ में

सुमन शर्मा एवं डॉ. विद्युत प्रकाश मिश्रा (Suman Sharma & Dr. Vidhyut Prakash Mishra)

प्रस्तुत शोध अ/ययन का प्रमुख उद्देश्य रीवा जिले में संचालित विभिन्न शासकीय रोजगार योजनाओं के स्थानीय बाजार संरचना एवं व्यापारिक गतिविधियों पर उनके प्रभाव का विश्लेषणात्मक मूल्यांकन किया गया है। ग्रामीण एवं अर्द्ध-शहरी क्षेत्रों में संचालित रोजगार योजनाएँ-  मनरेगा, स्वरोजगार योजनाएँ एवं कौशल विकास कार्यक्रम आदि केवल आय सृजन के साधन मात्र नहीं हैं, अपितु वे स्थानीय बाजारों में मांग एवं आपूर्ति की संरचना को भी प्रत्यक्ष एवं परोक्ष रूप से प्रभावित करती हैं। इन योजनाओं के मा/यम से लाभार्थियों की क्रय-शक्ति में वृद्धि होती है, जिसके परिणामस्वरूप उपभोग स्तर में विस्तार तथा व्यापारिक गतिविधियों में गतिशीलता परिलक्षित होती है। अ/ययन से यह भी स्पष्ट होता है कि इन योजनाओं के क्रियान्वयन में क्षेत्रीय असमानता, संसाधनों के वितरण में असंतुलन तथा बाजार अवसंरचना की अपर्याप्तता जैसी चुनौतियाँ विद्यमान हैं, जो इनके अपेक्षित प्रभाव को सीमित करती हैं और साथ ही संस्थागत समन्वय की कमी एवं सूचना के अभाव के कारण योजनाओं का लाभ सभी लक्षित वर्गों तक समान रूप से नहीं पहुँच पाता है। अतः यह आवश्यक प्रतीत होता है कि रोजगार योजनाओं के प्रभावी एवं पारदर्शी क्रियान्वयन के साथ-साथ स्थानीय बाजार संरचना के सुदृढ़ीकरण, अवसंरचनात्मक विकास तथा संस्थागत समर्थन को शासन स्तर पर प्राथमिकता प्रदान की जानी चाहिए। इस प्रकार रोजगार योजनाएँ न केवल आय एवं रोजगार के अवसरों का विस्तार कर सकती हैं, बल्कि स्थानीय आर्थिक विकास की प्रक्रिया को भी सुदृढ़ एवं सतत् दिशा प्रदान कर सकती हैं।

शब्दकोशः रोजगार योजनाएँ, स्थानीय बाजार, व्यापारिक गतिविधियाँ, आय वृद्धि, मांग-आपूर्ति, रीवा जिला, ग्रामीण अर्थव्यवस्था।
 


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