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INTERNATIONAL JOURNAL OF EDUCATION, MODERN MANAGEMENT, APPLIED SCIENCE & SOCIAL SCIENCE (IJEMMASSS) [ Vol. 8 | No. 1 (II) | January - March, 2026 ]

जयपुर की सांस्कृतिक पहचान ’जीमण परंपरा’ः एक सामाजिक अ/ययन

वन्दना भारद्वाज एवं डॉ. शिल्पी गुप्ता (Vandana Bhardwaj & Dr. Shilpi Gupta)

जयपुर की सांस्कृतिक पहचान बहुआयामी है, जिसमें ’जीमण परंपरा’ एक महत्वपूर्ण सामाजिक सांस्कृतिक घटक के रूप में उभरकर सामने आती है। यह अध्ययन जयपुर की जीमण परंपरा के ऐतिहासिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक पक्षों का विश्लेषण करता है। जीमण परंपरा के वह सामूहिक भोजन की व्यवस्था नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता, सहयोग, समानता और सांस्कृतिक निरंतरता का सशक्त माध्यम रही हैं। वैदिक कालीन ’अतिथि देवो भवः’ की अवधारणा से प्रेरित यह परंपरा मध्यकालीन राजपूत समाज में विकसित हुई और धीरे-धीरे लोकजीवन का अभिन्न अंग बन गई।

शब्दकोशः जीमण परंपरा, सामाजिक समरसता, सामूहिक भोजन, सांस्कृतिक निरंतरता, पंगत व्यवस्था, अतिथि सत्कार।
 


DOI:

Article DOI: 10.62823/IJEMMASSS/8.1(II).8791

DOI URL: https://doi.org/10.62823/IJEMMASSS/8.1(II).8791


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