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INTERNATIONAL JOURNAL OF EDUCATION, MODERN MANAGEMENT, APPLIED SCIENCE & SOCIAL SCIENCE (IJEMMASSS) [ Vol. 8 | No. 1 (II) | January - March, 2026 ]

आषाढ़ का एक दिन की भावनात्मक भाषा

समय सत्य प्रधान (Samay Satya Pradhan)

किसी भी कृति के लिए भाषा सबसे महत्त्वपूर्ण है और जब वह भावना प्रधान हो तो उसका असर सीधे पाठकों के ह्रदय पर होता है। आषाढ़ का दिन नाटक भावनात्मक नाटक है अर्थात उसकी भाषा भी उसी के अनुसार चुनी गई है संवाद भी वैसे ही लिखे गए हैं। साहित्य में रस का कार्य पाठकों का कृति से भावनात्मक सम्बन्ध स्थापित करना है। लेखक मोहन राकेश ने भी इस कृति में करुणा और श्रृंगार रस का उपयोग कर इस कृति को एक भावनात्मक भूमि प्रदान की है। इसलिए दर्शक और पाठक इस कृति से अपना जुड़ाव महसूस करते हैं।

शब्दकोशः आषाढ़ का एक दिन, भावनात्मक भाषा, रस निष्पत्ति, मोहन राकेश, नाट्यशास्त्र।


DOI:

Article DOI: 10.62823/IJEMMASSS/8.1(II).8881

DOI URL: https://doi.org/10.62823/IJEMMASSS/8.1(II).8881


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