विज्ञान और तकनीक ने मानव जीवन को सुविधासंपन्न बनाया है किंतु इसके साथ-साथ पर्यावरणीय संकट, प्राकृतिक संसाधनों का अविवेकपूर्ण दोहन,, नैतिक मूल्यों का पतन तथा जीवन-शैली में असंतुलन जैसी गंभीर समस्याएँ भी पैदा हुई हैं। विकास का आधुनिक मॉडल मुख्यतः भौतिक समृद्धि और आर्थिक वृद्धि पर केंद्रित रहा है जिसके परिणामस्वरूप प्रकृति और मनुष्य के बीच सामंजस्य टूटता चला गया है। इसी संदर्भ में सतत विकास की अवधारणा का उदय हुआ जो विकास और संरक्षण के बीच संतुलन स्थापित करने का प्रयास करती है। टिकाऊ विकास का मूल उद्देश्य केवल आर्थिक प्रगति नहीं अपितु ऐसा समग्र विकास है जिसमें पर्यावरण संरक्षण, सामाजिक न्याय और आर्थिक समानता का समन्वय हो।
शब्दकोशः भारतीय ज्ञान परंपरा, विज्ञान, तकनीक, मानव जीवन, भौतिक समृद्धि।
Article DOI: 10.62823/IJEMMASSS/8.1(II).8882