प्रस्तुत शोध लेख राजस्थान के कोटा जिले में आर.पी.एस.सी शिक्षक भर्ती परीक्षा की तैयारी कर रहे 300 विद्यार्थियों पर किए गए श्करियर दबाव एवं समायोजनश् का एक विश्लेषणात्मक अध्ययन है, जिसमें वर्णनात्मक सर्वेक्षण और मात्रात्मक शोध विधि का प्रयोग किया गया है। प्रस्तुत शोध अध्ययन के वैचारिक धरातल को सुदृढ़ करने के लिए ‘समायोजन’ की अवधारणा को समझना अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि शिक्षा व्यवस्था के बाजारीकरण, गलाकाट प्रतिस्पर्धा और पारिवारिक आकांक्षाओं के त्रिकोणीय चक्रव्यूह में फंसे विद्यार्थियों के लिए समायोजन मात्र एक मनोवैज्ञानिक शब्द नहीं, बल्कि उनके अस्तित्व और मानसिक संतुलन को बनाए रखने की एक अनिवार्य संघर्ष-प्रक्रिया है; जब शिक्षा प्रणाली अपनी उन्नत तकनीकों के बावजूद मानवीय मूल्यों को पीछे छोड़कर केवल श्रैंकश् और श्नंबरोंश् की मशीन बन जाती है, तो पिछड़ने वाले विद्यार्थियों में हीन भावना, अवसाद और आत्मग्लानि का जन्म होना स्वाभाविक है और ऐसी स्थिति में जब छात्र अपनी व्यक्तिगत योग्यताओं और कोचिंग हब के कठोर अस्वस्थ परिवेश के बीच संतुलन बिठाने का प्रयास करता है, तो इसी मानसिक कशमकश और अनुकूलन को मनोविज्ञान की भाषा में समायोजन कहा जाता है; प्रसिद्ध मनोवैज्ञानिक एल. एफ. शेफ़र के अनुसार समायोजन वह प्रक्रिया हैद्ययह लेख राजस्थान राज्य में कोचिंग में अध्ययनरत विद्यार्थियो में करियर के प्रति समायोजन का विश्लेषणात्मक अध्ययन हेतु किया गया है।
शब्दकोशः करियर दबाव, विद्यार्थी समायोजन, कोटा कोचिंग हब, आर.पी.एस.सी शिक्षक भर्ती परीक्षा, पारिवारिक अपेक्षाएँ, प्रतिस्पर्धात्मक दबाव, मनोवैज्ञानिक स्वास्थ्य, विश्लेषणात्मक अध्ययन, राजस्थान।
Article DOI: 10.62823/IJEMMASSS/8.1(II).8924