रीवा जिला, जो म/यप्रदेश के विं/य क्षेत्र का एक प्रमुख भू-भाग है, प्राकृतिक संसाधनों विशेषकर वनोपज की दृष्टि से समृद्ध रहा है। वनोपज जैसे तेंदूपत्ता, महुआ, हर्रा, बहेरा, आंवला आदि न केवल पारंपरिक आजीविका का आधार हैं, बल्कि वर्तमान में इनके वाणिज्यिक उपयोग ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। प्रस्तुत शोध पत्र का उद्देश्य रीवा जिले में वनोपज आधारित गतिविधियों के मा/यम से रोजगार सृजन एवं आय वृद्धि के अवसरों का विश्लेषणात्मक अ/ययन किया गया है। विपणन तंत्र की कमजोरियाँ, म/यस्थों का हस्तक्षेप तथा तकनीकी ज्ञान का अभाव इस क्षेत्र के विकास में बाधा उत्पन्न करते हैं। अ/ययन से यह प्रतीत होता है कि उचित नीति समर्थन, प्रशिक्षण एवं अवसंरचना का विकास किया जाए तो वनोपज आधारित अर्थव्यवस्था न केवल रोजगार सृजन को बढ़ावा दे सकती है, बल्कि क्षेत्रीय आर्थिक विकास में भी महत्वपूर्ण योगदान दे सकती है।
शब्दकोशः वनोपज, रोजगार सृजन, आय वृद्धि, लघु वनोपज, वाणिज्यिकरण, रीवा जिला, ग्रामीण अर्थव्यवस्था।
Article DOI: 10.62823/JMME/16.01(II).8955