सोम पृथ्वी स्थानीय दैवीय शक्ति माने गये हैं। ऋग्वेद के नवम मण्डल में सभी सूŸाक सोम के प्रति ही समर्पित हैं । सोम एक विषेष प्रकार की लता में से निकाला जाने वाला, बलवर्धक व आनन्ददायक पेय था। सोमयागों का वैदिक कर्मकाण्डों में अत्यन्त महत्वपूर्ण स्थान है। इन योगों में दिन में तीन बार प्रातः, सायं व म/याहान सोम का सवन करके वैदिक देवताओं का तदनुसार विभाजन करने के उपरान्त सोमपान के हेतु आमन्त्रित किया जाता था। वैदिक आर्य दूध एवं मधुमिश्रित सोम देवताओं को अर्पित करने के उपरान्त स्वयं पान करते थे।
1. सोमस्येव मौजवतस्य भक्षों.................। ऋृ. 10-34-1।।
2. अत्रैव वो पि न ह्याम्युभे आर्लो इव .................। ऋृ. 10-166-3।।
3. पद यदस्य परमें व्योमन् यतो विश्वा.................। ऋृ. 9-87-15।।
4. श्येनों यदन्धी अभरत् परावतः.................। ऋृ. 09-68-6।।
5. य ते श्येन पदाभरत् तिरों रजांस्यस्पृतम्.................। ऋृ. 8-8-9।।
6. शतं म पुर आयसीर रक्षन्नध श्येनों.................। ऋृ. 4-27-1।।
7. अव यच्छयेनों अस्वनीदघ द्योर्पि................। ऋृ. 4-27.3-4।।
8. आभ्य दिवो मातरिश्वा जभामामथनादन्य................। ऋृ. 1-93-6।।
9. पतिः सिन्धुनाडभवनत्................। ऋृ. 9-15-6।।
10. ब्लूमफील्ड, रिलीजन आफ द वेदा पृ. 146
11. गयाचरण त्रिपाठी, वैदिक देवता. पृ. 627
12. अयं वामद्रिभिः सुतः सोमोनरा वृष्ण्वसु................। ऋृ. 8-22-8।।
सोम नमस्य राजानं यो जरो वीरूधां पति................। ऋृ. 9-114-2।।
13. तैत्तिरीय संहिता 6.1.5
14. त सोममाहियमाणे गन्धर्वो विश्वावसु पर्यमुष्णात्। तै.सं. 6.1.6
15. विश्वावसुस्य तिस्त्रों रात्रीरूपहतो वसत् .........। का.सं. 24.1
16. दिवि वै सोम आसीत्। तं देवा आकमयन्त। श.ब्रा. 3.6.2.15
17. तस्या आहरन्त्यै गन्धर्वों ..................... । श.ब्रा.3.2.4.2
18. सोमो वै राजाडमुष्मिल्लोके आसीत्, तं देवाश्च ऋृषयश्वाभ्यधायन् कथमयत्स्मात् सोमो.........। एत.ब्रा.3.3.1
19. तस्या अनुविसृज्य कृशानु सोमपालः.........। एत.ब्रा.3.3.1
20. महा. 1.16.5-24
21. महा. 1.20.4-9
22. महा. 1.22.3-7
23. महा. 1.23.5-29
24. महा. 1.32.1-25
25. महा. 1.33.1-11
26. न कार्य यदि सोमेन मम् सोमः प्रदीयताम् .........। महा. 1.33.8
27. महा. 1.31.1-19
सहायक गन्थ सूची
1. ऋृग्वेद संहिता, (सायण भाष्य सहित), वैदिक संशोधन मण्डल 1933-46, पूना।
2. तैत्तिरीय संहिता, (भट्ट भास्कर, सायण भाष्य सहित), वैदिक संशोधन मण्डल 1970-81, पूना।
3. मा/यंदिन संहिता, (सायण भाष्य सहित), मोतीलाल बनारसी 1971 ई. दिल्ली।
4. काठक संहिता, (व्याख्याकार सायण भाष्य), स्वा/याय मण्डल 1958-60, पारडी।
5. एतरेय ब्राम्हण, (सायण भाष्य सहित) सम्या. एवं अनु. डॉ. सुधाकर मालवीय, तारा प्रिंटिंग वर्क्स 1980
6. शतपथ ब्राम्हण, ( सायण भाष्य सहित), चौखम्बा संस्कृत सीरीज 1964, वाराणसी।
7. ठसववउपिमसकए डंनतपबमए ज्ीम त्मसपहपवद व िटमकंेए प्दकवसवहपबंस ठववा भ्वनेमए क्मसीप 1972
8. गयाचरण त्रिपाठी, वैदिक देवता-उद्भव और विकास, भारतीय विद्या प्रकाशन दिल्ली, 1981
Article DOI: 10.62823/JMME/16.01(II).9061