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INTERNATIONAL JOURNAL OF EDUCATION, MODERN MANAGEMENT, APPLIED SCIENCE & SOCIAL SCIENCE (IJEMMASSS) [ Vol. 8 | No. 2 (II) | April - June, 2026 ]

आधुनिक भारतीय चित्रकला में प्रोग्रेसिव आर्टिस्ट ग्रुप का योगदान

डॉ. विजेयता चारण (Dr. Vijeyta Charan)

कलाओं में चित्रकला का इतिहास अगर देखें तो मुख्य रूप से यह चित्रकारों द्वारा कला सम्बन्धी दृष्टिकोण में हुए बदलाव का इतिहास है। हालांकि चित्रकला का इतिहास उतना ही प्राचीन है जितना मनुष्य सभ्यता का इतिहास है। योरोपीय पुनर्जागरण ने मनुष्य जीवन के विविध पक्षों पर प्रभाव डाला। चित्रकला इससे अछूती कैसे रह सकी है। अतः चित्रकला में वैज्ञानिक दृष्टिकोण द्वारा अपनी पद्धति में परिवर्तन किये तो उसकी कलाकृति में भौतिक सौन्दर्य, सृष्टि के सच्चे रूप का अंकन नए मापदण्ड बने।

चारण, विजेयता (2026) भारतीय चित्रकला में प्रोग्रेसिव आर्टिस्ट ग्रुप का योगदाInternational Journal of Education, Modern Management, Applied Science & Social Science, 08(02(II)), 171–175. https://doi.org/10.62823/IJEMMASSS/8.2(II).9099

1.    कांजिलाल, भारतीय कला का इतिहास, पृ.सं. 85 सरस्वती हाऊस प्राइवेट लिमिटेड, एजुकेशन पब्लिशर, नई दिल्ली, 2010
2.    प्राणनाथ मागो, भारत की समकालीन कला, पृ.सं. 11 एक परिप्रेक्ष्य (अनुवाद सौमित्र मोहन) नेशनल बुक ट्रªस्ट इंडिया, नई दिल्ली, 2011
3.    वही, पृ.सं. 106
4.    प्रेमचन्द गोस्वामी ,आधुनिक भारतीय चित्रकला के आधारस्तम्भ, पृ.सं. 77 राजस्थान हिंदी ग्रंथ अकादमी, जयपुर, 1995
5.    प्राणनाथ मागो, भारत की समकालीन कला - एक परिप्रेक्ष्य, पृ.सं. 66
6.    विनोद भारद्वाज, बृहद आधुनिक कलाकोश, पृ.सं. 9 वाणी प्रकाशन, नई दिल्ली, 2009
7.    मागो प्राणनाथ, भारत की समकालीन कला - एक परिप्रेक्ष्य, पृ.सं. 72
8.    वही, पृ.सं. 75
9.    वही, पृ.सं. 76 
10.    वही, पृ.सं. 106
11.    राम मनोहर सिन्हा, समकालीन कला, अंक 17, मई, 1996, समकालीन कला के आयाम, पृ. सं. 26


DOI:

Article DOI: 10.62823/IJEMMASSS/8.2(II).9099

DOI URL: https://doi.org/10.62823/IJEMMASSS/8.2(II).9099


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