वैश्विक संघर्षों (जैसे पश्चिम एशिया और पूर्वी यूरोप के संकट) के कारण कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने से भारत का व्यापार घाटा और चालू खाता घाटा (ब्।क्) बढ़ जाता है। साथ ही, विदेशी निवेशक भारतीय बाजार से पैसा निकालकर अमेरिकी डॉलर में निवेश करते है। इन कारणों से डॉलर के मुकाबले भारतीय रूपया लगातार कमजोर हो रहा है और प्रत्यक्ष विदेशी निवेश एवं संस्थागत निवेश घट रहा ळे जो संस्थागत विकास को अवरूद्व करता है। रूपया के कमजोर होने के कारण आयात मंहगे हो जाते है, जिससे घरेलू बाजार में मंहगाई बढ़ जाती है।
Article DOI: 10.62823/IJEMMASSS/8.2(II).9116