‘प्रकाश काव्य’ भारतीय साहित्य की समृद्ध काव्य-परंपरा का एक महत्त्वपूर्ण अंग है, जिसमें मानवीय जीवन, सामाजिक चेतना, सांस्कृतिक मूल्यों तथा आध्यात्मिक दृष्टि का प्रभावशाली चित्रण मिलता है। प्रस्तुत अध्ययन में ‘प्रकाश काव्य’ के ऐतिहासिक विकास, साहित्यिक पृष्ठभूमि, प्रमुख विशेषताओं, भाषा-शैली, भाव-पक्ष एवं कला-पक्ष का विश्लेषणात्मक अध्ययन किया गया है। साथ ही, काव्य में निहित मानवीय संवेदनाओं, नैतिक मूल्यों तथा समकालीन प्रासंगिकता का भी विवेचन किया गया है। यह अध्ययन ‘प्रकाश काव्य’ की साहित्यिक गरिमा, ऐतिहासिक महत्त्व एवं भारतीय काव्य-परंपरा में उसके विशिष्ट योगदान को रेखांकित करता है तथा शोधार्थियों एवं साहित्य-प्रेमियों के लिए उपयोगी संदर्भ प्रस्तुत करता है।
1. शेखावत, सौभाग्यसिंह के पास उपलब्ध ह. लि. प्रति, छंद-120
2. वही, छंद-131
3. जिज्ञासु, डॉ. मोहनलालः चारण साहित्य का इतिहास, भाग-1, पृ.239
4. ओझा, गौरीशंकर हीराचंदः राजपूताने का इतिहास, भाग-2, पृ. 612
5. वही, पृ. 608
6. विरद सिणगार, छंद-43-44
7. स्वामी, नरोत्तमदास (सम्पा.)ः बांकीदास री ख्यात, पृ.172
8. शेखावत, सौभाग्यसिंहः राजस्थानी साहित्य सम्पदा,पृ.73
9. मेनारिया, डॉ. मोतीलालः राजस्थानी भाषा और साहित्य, पृ.206
10. लालस, सीताराम (सम्पा.)ः रघुवरजस प्रकाश, पृ.6
11. वही, पृ. 8
12. भाटी, डॉ.नारायणसिंह (सम्पा.)ः पाबूप्रकाश, महा.मानसिंह पुस्तक प्रकाश, जोधपुर
13. सिंह, कविराव मोहन (सम्पा.)ः केहर प्रकाश, वैदिकमंत्रालय, अजमेर, 1934 ई.
14. राठौड़, डॉ. प्रतापसिंहः राजस्थानी वीराख्यान, पृ. 91