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INSPIRA-JOURNAL OF MODERN MANAGEMENT & ENTREPRENEURSHIP(JMME) [ Vol. 16 | No. 3 | July - September, 2026 ]

पंडित दीनदयाल उपाध्याय का राष्ट्रवादी चिन्तन

डॉ. वर्षा सागरकर एवं रेनु कुमारी (Dr. Varsha Sagarkar & Renu Kumari)

पंडित दीनदयाल उपाध्याय एक ऐसे बहुआयामी व्यक्तित्व के धनी थे, जिनके जीवन और चिंतन में आध्यात्मिक चेतना तथा राजनीतिक व्यवहार का अद्भुत समन्वय दिखाई देता है। उनका व्यक्तित्व अत्यंत सरल, संयमित और सादगीपूर्ण था, किंतु उनके विचार गहन, व्यावहारिक और राष्ट्रहित से ओतप्रोत थे। वे केवल एक राजनीतिज्ञ ही नहीं थे, बल्कि संगठनकर्ता, कुशल वक्ता, समाज-चिंतक, अर्थ-विचारक, शिक्षाविद्, लेखक और पत्रकार के रूप में भी उनकी भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही। भारतीय राजनीतिक परिदृश्य में प्रभावशाली विचारक के रूप मं उपा/याय ने राष्ट्र की अवधारणा की कल्पना की थी। राष्ट्र की उनकी अवधारणा न केवल भौगोलिक सीमाओं से परे जाती है, बल्कि दार्शनिक और वैचारिक ढांचे को भी शामिल करती है। इनका राष्ट्रवाद समाजिक एकजुटता, सांस्कृतिक पहचान और सामूहिक चेतना के महत्व पर जोर देता है। उपा/याय का राष्ट्रवाद उनके एकात्मक मानवाद की अवधारणा पर केन्द्रित है उनका मानना था कि एक राष्ट्र को व्यक्ति स्वतंत्रता और समुदाय की भलाई के बीच संतुलन बनाने का प्रयास करना चाहिए। उपा/याय ने व्यक्तियों के बीच समाजिक सदभाव और सहयोग के महत्व जोर देते हुए कहा कि एक राष्ट्र को सामूहि प्रगति और विकास के लिए प्रयास करना चाहिए।

1.    मानव दर्शन, नई दिल्ली, सुरूचि प्रकाशन, प्रथम संस्करण
2.    उपा/याय, दीनदयाल, जगद्गुरु श ंकराचार्य, प्रभात प्रकाशन, नई दिल्ली, 2018 . 
3.    उपा/याय, दीनदयाल, राष्ट्र चिन्तन, राष्ट्र धर्म पुस्तक प्रकाशन, लखनऊ आवृत्ति, वर्ष प्रतिपदा, 2029 
4.    उपा/याय, दीनदयाल, एकात्म मानव दर्शन, दीनदयाल गुरुजी, ठेंगड़ी, सुरुचि प्रकाशन, केशव कुन्ज, नई दिल्ली, 2017.
5.    उपा/याय, दीनदयाल, एकात्म मानववाद, भारतीय जनता पार्टी, म/यप्रदेश, 1985 
6.    उपा/याय, दीनदयाल, पॉलिटिकल डायरी, सुरुचि प्रकाशन, नई दिल्ली, 1991
7.    उपा/याय, दीनयाल, एकात्म मानवदर्शन- विवेचन, सिद्धान्त एवं तत्व मीमांसा, प्रभात प्रकाशन, नई दिल्ली, 2018 
8.    कुलकर्णी, शरद आनन्द, पं. दीनदयाल विचार दर्शन, खण्ड-4,सुरुचि प्रकाशन,नई दिल्ली,  
9.    किशोर, नवल, मानववाद और साहित्य 15. केलकर, भालचन्द्र कृष्णाजी, पं. दीनदयाल उपा/याय विचार दर्शन, खण्ड-3 सुरुचि प्रकाशन, नई दिल्ली, 1960 
10.    केलकर, श्री भा.कृ., राजनीतिक चिन्तन (दीनदयाल जी से उनके अनुयायियों को उत्तराधिकार में मिली राजनैतिक पद्धति), सुरुचि प्रकाशन झण्डेवाला,  नई दिल्ली, 2014
11.    गुप्त, मन्मथनाथ, भारतीय क्रान्तिकारी आन्दोलन का इतिहास, दिल्ली, आत्माराम एण्ड संस,1961  
12.    गोलवलकर, माधवराव सदाशिवराव, श्री गुरुजी: समग्र दर्शन (सातों खण्ड), नागपुर भारतीय विचार साधना, /येय दर्शन, लखनऊ, भारतीय राष्ट्रधर्म प्रकाशन, 1946,
13.    गोयनका, कमल किशोर, पं. दीनदयाल उपा/याय: व्यक्ति दर्शन, नई दिल्ली, दीनदयाल शोध संस्थान, 1972
14.    गौड़, तेज सिंह, जैन धर्म का संक्षिप्त इतिहास, मद्रास, जय/वज प्रकाशन समिति
15.    चन्द्र, प्रकाश, पॉलिटिकल, फिलॉसफी ऑफ एम.एन. राय, मेरठ, स्वरूप एण्ड संस, 1995
16.    चतुर्वेदी, मुनिन्द्र मोहन, पं. दीनदयाल उपा/याय की समाज विज्ञान को देन, इटावा, शोध ग्रन्थ, 1988 
17.    जोग, श्री बा.ना., राजनीति राष्ट्र के लिये (राज्य और राजनीति सा/य नहीं, मात्र साधक है। सा/य है राष्ट्र का परम वैभव), सुरुचि प्रकाशन झण्डेवाला, नई दिल्ली, 2014
18.    ठेगड़ी, श्री दत्तोपत्त, तत्व जिज्ञासा (अनुव्रती 6 खंडों की प्रस्तावना स्वरूप स्वतंत्र विवेचन), सुरुचि प्रकाशन झण्डेवा।
 


DOI:

Article DOI: 10.62823/JMME/16.03.9242

DOI URL: https://doi.org/10.62823/JMME/16.03.9242


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