द्वितीय विश्वयुद्ध (1939-1945) में ब्रिटिश भारतीय सेना के साथ-साथ देशी रियासतों की सैन्य टुकड़ियों ने भी मित्र राष्ट्रों के युद्ध-प्रयासों में महत्त्वपूर्ण योगदान दिया। राजपूताना की प्रमुख रियासतों में जोधपुर राज्य इस दृष्टि से विशेष उल्लेखनीय था। महाराजा उम्मेद सिंह के शासनकाल में जोधपुर राज्य सेना ने न केवल अपनी सैन्य शक्ति का विस्तार किया, बल्कि युद्ध की बदलती तकनीकी आवश्यकताओं के अनुरूप संगठन और प्रशिक्षण में भी महत्त्वपूर्ण परिवर्तन किए। युद्ध के आरंभ में लगभग 1,700 सैनिकों वाली जोधपुर राज्य सेना में जोधपुर सरदार रिसाला, जोधपुर सरदार इन्फैंट्री, म्यूल ट्रूप, सैन्य अस्पताल और किले की रक्षा टुकड़ी जैसी इकाइयाँ सम्मिलित थीं। युद्धकाल में इसकी सैन्य संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई। इस अध्ययन का प्रमुख केंद्र जोधपुर लांसर्स और जोधपुर सरदार इन्फैंट्री की युद्धकालीन भूमिका है। जोधपुर लांसर्स का पारंपरिक अश्वारोही सैन्य इकाई से यंत्रीकृत रेजिमेंट में परिवर्तन राज्य की सैन्य व्यवस्था में आधुनिक तकनीक के प्रवेश का महत्त्वपूर्ण उदाहरण था। यंत्रीकरण के पश्चात् इस इकाई ने मध्य-पूर्व और फारस में सामरिक प्रतिष्ठानों तथा महत्त्वपूर्ण आपूर्ति मार्गों की सुरक्षा से संबंधित दायित्व निभाए। दूसरी ओर, जोधपुर सरदार इन्फैंट्री की इरिट्रिया और मिस्र में तैनाती के बाद सितंबर 1943 के सालेरनो अभियान में भागीदारी विशेष रूप से उल्लेखनीय रही। सालेरनो में इस इकाई की कंपनियों ने समुद्र तट पर सैन्य सामग्री उतारने, आपूर्ति व्यवस्था स्थापित करने तथा अग्रिम सैन्य अभियानों के लिए आवश्यक रसद सुनिश्चित करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसके अधिकारियों और सैनिकों को उनकी सेवाओं एवं वीरता के लिए सैन्य सम्मान भी प्रदान किए गए। प्रस्तुत शोधपत्र उपलब्ध सैन्य विवरणों के आधार पर जोधपुर राज्य सेना के संगठन, यंत्रीकरण, विदेशी युद्धक्षेत्रों में तैनाती और युद्धकालीन विस्तार का ऐतिहासिक विश्लेषण करता है। अध्ययन का मूल तर्क है कि द्वितीय विश्वयुद्ध में जोधपुर राज्य का योगदान केवल ब्रिटिश युद्ध-प्रयासों को सैनिक उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं था; इस युद्ध ने राज्य की पारंपरिक सैन्य व्यवस्था को आधुनिक युद्ध-पद्धति, तकनीकी प्रशिक्षण और विस्तृत सैन्य संगठन के अनुरूप रूपांतरित करने की प्रक्रिया को भी गति प्रदान की। इस प्रकार जोधपुर राज्य सेना का युद्धकालीन अनुभव रियासती सैन्य इतिहास और आधुनिक भारतीय सैन्य परंपरा के संक्रमण को समझने के लिए एक महत्त्वपूर्ण ऐतिहासिक संदर्भ प्रस्तुत करता है।