आज के समय में नौ-परिवहन अर्थात जल परिवहन की प्रासंगिकता अत्यधिक बढ़ गई है, क्योंकि यह अंतरराष्ट्रीय व्यापार का सबसे सस्ता व सुलभ मा/यम है। वैश्विक स्तर पर कुल व्यापार का लगभग नब्बे फीसदी समुद्री मार्ग से ही होता है। यह भारी व थोक सामान जैसे कोयला, तेल आदि ढोने के लिए सबसे किफायती व पर्यावरण-अनुकूल साधन है। नौ-परिवहन विश्व की सबसे प्राचीन परिवहन प्रणालियों में से एक है। मानव सभ्यता के विकास में नदियों और समुद्रों का विशेष योगदान रहा है। प्राचीन काल में व्यापार, सांस्कृतिक आदान-प्रदान तथा यात्राओं का प्रमुख साधन नौ-परिवहन ही था। आधुनिक समय में तकनीकी विकास के कारण जहाजों की क्षमता, गति तथा सुरक्षा में अत्यधिक वृद्धि हुई है, जिससे यह परिवहन प्रणाली और अधिक प्रभावी बन गई है। वर्तमान वैश्विक अर्थव्यवस्था में इसका महत्व लगातार बढ़ रहा है। अंतरराष्ट्रीय व्यापार, ऊर्जा सुरक्षा, पर्यटन, पर्यावरण संरक्षण तथा राष्ट्रीय आर्थिक विकास में नौ-परिवहन की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। भारत जैसे विशाल समुद्री तट वाले देश के लिए नौ-परिवहन आर्थिक प्रगति का प्रमुख आधार है। नौ-परिवहन उद्योग, बंदरगाहों, जहाज निर्माण, मत्स्य उद्योग तथा लॉजिस्टिक्स क्षेत्र में लाखों लोगों को रोजगार प्रदान करता है और आर्थिक विकास में योगदान देता है। इससे राष्ट्रीय आय और विदेशी मुद्रा अर्जन में भी वृद्धि होती है। अन्य परिवहन साधनों की तुलना में जल परिवहन कम ईंधन की खपत करता है तथा प्रति टन माल पर कम कार्बन उत्सर्जन करता है। इसलिए इसे अपेक्षाकृत पर्यावरण-अनुकूल परिवहन माना जाता है। नौ-परिवहन के समक्ष चुनौतियाँ- समुद्री प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन का प्रभाव तथा समुद्री सुरक्षा एवं समुद्री डकैती जैसी समस्याएँ हैं। भू राजनीतिक कारणों से दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण जलमार्ग बंद होने से वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला बाधित होती है और तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में भारी वृद्धि होती है। वर्तमान समय में नौ-परिवहन केवल एक परिवहन साधन नहीं, बल्कि वैश्विक व्यापार, आर्थिक विकास, ऊर्जा सुरक्षा और सतत विकास का प्रमुख आधार बन चुका है। भारत के लिए भी यह आत्मनिर्भर अर्थव्यवस्था, निर्यात वृद्धि और रोजगार सृजन का महत्वपूर्ण मा/यम है। इसलिए समुद्री सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को मजबूत करना तथा नौ-परिवहन के आधुनिकीकरण, पर्यावरण संरक्षण तथा अवसंरचना विकास पर विशेष /यान देना समय की आवश्यकता है।
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Article DOI: 10.62823/IJEMMASSS/8.3(II).9356