काव्य नाटकों में रंगमंच की परम्परा अतिदीर्घकालिक रही है, क्योंकि काव्य नाटकों के उद्भव के साथ ही इनमें अभिनयात्मकता के रहते रंगमंचीय संकेतों का सुन्दर समन्वय देखा गया है। चूँकि काव्यनाटकों या गीतिनाटकों में अभिनय अथवा नाटकीयता की अपेक्षा भावप्रवणता अधिक प्रबल रहती है, अतैव इन्हें रंगमंचीय दृष्टि से सफल बनाना एक चुनौती ही होता है, तथापि नाटककार अपने कौशल व प्रतिभा से ऐसा करने में सक्षम होते हैं। इस संदर्भ में आधुनिक युगीन डॉ. देवेन्द्र दीपक के काव्य नाटकों को देखें तो इनके चारों काव्य नाटक- भूगोल का राजा: खगोल का राजा, दबाव, काँवर श्रवण कुमार की, सुषेण पर्व- काव्य-सौन्दर्य, भाव-सौन्दर्य और रंगमंच की दृष्टि से उŸाम और सफल नाटक रहे हैं। प्रस्तुतालेख में डॉ. देवेन्द्र के इन्हीं चारों काव्य नाटकों का रंगमंचीय दृष्टि से गवेषणात्मक अ/ययन-पर्यालोचन प्रस्तुत किया गया है।
1. शर्मा, डॉ. कृष्णमुरारी (संकलनकर्ता एवं सम्पादक): भारतीय नाट्य रंग, पृ. 36
2. दीपक, डॉ. देवेन्द्र: भूगोल का राजा: खगोल का राजा, पृ. 17
3. दीपक, डॉ. देवेन्द्र: काँवर श्रवण कुमार की, पृ. 21
4. दीपक, डॉ. देवेन्द्र: भूगोल का राजा: खगोल का राजा, पृ. 20-22
5. देवलिया, डॉ. राजेश्वरी: काव्य नाटकों का अभिव्यंजना शिल्प, पृ. 82
6. दीपक, डॉ. देवेन्द्र: भूगोल का राजा: खगोल का राजा, पूर्विका, पृ. अप
7. वही, भूमिका, पृ. गपप
8. वही, भूमिका, पृ. गपपप
9. वही, भूमिका, पृ. गपप.गपपप
10. दीपक, डॉ. देवेन्द्र: दबाव, पृ. 6-6
11. दीपक, डॉ. देवेन्द्र: काँवर श्रवण कुमार की, पृ. 23-24
12. दीपक, डॉ. देवेन्द्र: सुषेण पर्व, पृ. 24
13. दीपक, डॉ. देवेन्द्र: भूगोल का राजा: खगोल का राजा, पृ. 60
14. वही, पृ. 43-44
15. वही, दबाव, पृ. 12
16. वही, काँवर श्रवण कुमार की, पृ. 56
17. वही, सुषेण पर्व, पृ. 103
18. वही, सुषेण पर्व, दृश्य-2, पृ. 37
19. दीपक, देवेन्द्र: भूगोल का राजा: खगोल का राजा, (2011), साहित्य रत्नालय, कानपुर।
20. दीपक, देवेन्द्र: दबाव (1995), कला प्रकाशन, शाहदरा, दिल्ली।
21. दीपक, देवेन्द्र: काँवर श्रवण कुमार की, (2016), सस्ता साहित्य मण्डल प्रकाशन, नई दिल्ली।
22. दीपक, देवेन्द्र: सुषेण पर्व (2021), इन्द्रा पब्लिशिंग हाउस, भोपाल।
23. देवलिया, डॉ. राजेश्वरी: काव्य नाटकों का अभिव्यंजना शिल्प, (1997), साहित्य संगम, इलाहाबाद।
24. शर्मा, डॉ. कृष्णमुरारी (संकलनकर्ता एवं सम्पादक): भारतीय नाट्य रंग, (संवत् 2067), अखिल भारतीय साहित्य परिषद् न्यास, झण्डेवालान, नई दिल्ली।
Article DOI: 10.62823/IJEMMASSS/8.3(III).9531