राष्ट्र निर्माण में नारी का योगदान अत्यन्त महत्वपूर्ण एवं प्रतिकूल रहा है। नारी ने हर युग में समाज के विकास और प्रगति में अपनी भूमिका निभाई है, वह केवल परिवार की संरक्षिका नहीं है, बल्कि समाज और राष्ट्र की संरक्षिका भी है। नारी ने षिक्षा, स्वास्थ्य, राजनीति, कला विज्ञान और सामाजिक सुधार के क्षेत्र में अपनी प्रतिभा और गुणों से लेकर देष को आगे बढाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। नारी प्रकृति एवं ईष्वरीय जगत का अद्भूत पवित्र सा/य है जिसे अनुभव करने के लिए पवित्र साधन एवं दृष्टि होना आवष्यक है, नारी का स्वरूप विराट होता है जिसके समक्ष स्वयं विद्याता भी नतमस्तक हो जाते है। समाज के सांस्कृतिक, धार्मिक, भौगोलिक, ऐतिहासिक और साहित्यिक जगत में नारी यानी स्त्री का दिव्य स्वरूप प्रस्फुटित हुआ है और जिसके फलस्वरूप राष्ट्र ने नई -नई ऊचाईयों को भी षिरोधार्य किया है। सभ्यता, संस्कृति, संस्कार और परंपराएॅ महिलाओं के कारण ही एक पीढी से दूसरी पीढी में हस्तांतरित होती है।