सूचना और संचार प्रौद्योगिकी (प्ब्ज्) के इस आधुनिक युग में उच्च शिक्षा पारिस्थितिकी तंत्र में डिजिटल संसाधनों का प्रभाव निरंतर बढ़ता जा रहा है। प्रस्तुत शोध पत्र का मुख्य उद्देश्य जयपुर जिले (राजस्थान) के विभिन्न महाविद्यालयों के कला, विज्ञान और वाणिज्य संकायों के विद्यार्थियों की अ/ययन आदतों (ैजनकल भ्ंइपजे) और शैक्षिक उपलब्धि (।बंकमउपब ।बीपमअमउमदज) पर ई-संसाधनों (म्.त्मेवनतबमे) की उपयोगिता के प्रभाव का एक व्यापक तुलनात्मक अ/ययन करना है। शोध के लिए वर्णनात्मक सर्वेक्षण पद्धति (क्मेबतपचजपअम ैनतअमल डमजीवक) का प्रयोग करते हुए यादृच्छिक प्रतिचयन विधि द्वारा जयपुर जिले के उच्च शिक्षण संस्थानों से कुल 600 विद्यार्थियों (कलाः 200, विज्ञानः 200, वाणिज्यः 200, जिसमें 300 छात्र और 300 छात्राएं शामिल हैं) का संतुलित प्रतिदर्श (ैंउचसम) चयनित किया गया। विद्यार्थियों की अ/ययन आदतों को मापने के लिए एक स्वनिर्मित अ/ययन आदत मापनी (ैजनकल भ्ंइपजे ैबंसम) का उपयोग किया गया तथा शैक्षिक उपलब्धि को मापने के लिए उनके गत वर्ष के परीक्षा परिणाम के प्रतिशत (ः) को आधार बनाया गया। विभिन्न समूहों के बीच सांख्यिकीय अंतरों के विश्लेषण और 6 शून्य परिकल्पनाओं के परीक्षण के लिए स्वतंत्र प्रतिदर्श टी-परीक्षण (ज.जमेज) तकनीक का अनुप्रयोग किया गया। सांख्यिकीय निष्कर्षों से स्पष्ट हुआ कि संकाय के कम्बाइंड स्तर पर विज्ञान (डमंद = 174.24) और कला (डमंद = 173.28) संकाय के विद्यार्थियों का अ/ययन आदत स्कोर वाणिज्य संकाय (डमंद = 170.70) की तुलना में क्रमशः 0.01 और 0.05 स्तर पर सार्थक रूप से श्रेष्ठ पाया गया। परीक्षा परिणाम प्रतिशत के मामले में भी विज्ञान के विद्यार्थियों का प्रदर्शन (72ण्99ः) वाणिज्य (68ण्96ः) से सांख्यिकीय रूप से सार्थक रूप से बेहतर था। लैंगिक विश्लेषण (ळमदकमत ।दंसलेपे) के परिणामों से स्पष्ट हुआ कि ई-संसाधनों के उपयोग के स्तर पर छात्र-छात्राओं में समानता होने के बावजूद, कला (ज = 2.455) आर वाणिज्य (ज = 2ण्878) संकाय के भीतर छात्राओं का परीक्षा परिणाम प्रतिशत छात्रों की तुलना में सांख्यिकीय रूप से सार्थक रूप से उच्च और श्रेष्ठ रहा है। यह अ/ययन जयपुर जिले में ई-संसाधनों के व्यावहारिक प्रबंधन और वाणिज्य संकाय हेतु विशेष डिजिटल मार्गदर्शन कार्यक्रमों की आवश्यकता पर बल देता है।